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Showing posts from June, 2023

आर्य वेद और ईरानी सभ्यता.

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 #आर्य_वेद_और_ईरानी_सभ्यता """"""""""""""""""" दरअसल आर्य शब्द का अर्थ श्रेष्ठता का सूचक है आर्य येपेत वंशजी हैं. चालाकी से बाद में इसे निवर्तमान में इसे कर्म आधारित पदवी बताया जाता है. आर्य नूह पुत्र येपेत के वंशज हैं. ये बड़े शूरवीर, ज्योतिष विद्या के धनी जिज्ञासु और प्रकृति के करीब रहकर प्राकृतिक घटनाओं, खगोलीय घटनाओं की पड़ताल करनेवाले बड़े जुझारू प्रवृत्तियों के लोग थे. उत्तम किस्म के घोड़े और खच्चर पालना इनका व्यवसाय हुआ करता था.इनकी कद काठी बड़ी डील डौल और रंग गेहुंआ होता था.इनका संबंध मादियों(medos) फारसियों, यूनानियों से था.        खोजी प्रवृत्ति के होने के कारण ये जलमार्गों की खोज कर नए नए द्वीपों में सपरिवार जाकर जंगलों की सफाई कर पशुपालन के लिए बस जाते थे. वास्कोडिगामा, सिकंदर महान और तमाम यूनानी दार्शनिक गलीलियो आदि येपेत के वंशज ही थे.         ये एकेश्वरवादी मूर्ति और प्रकृति पूजा के खिलाफ थे.यहूदी शास्त्रों की प्रार्थनाओं को अपने आध्यात्म में इस्तेमाल करते थे. बाद में इन्हीं प्रार्थ...

मैं मृत्यु सिखाता हूँ

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#मैं_मृत्यु_सिखाता_हूँ. एक आदमी सोया हो, उसे फिर कुछ भी पता नहीं रह जाता कि मैं कौन हूं? क्या हूं? कहां से हूं? नींद के अंधकार में सब डूब जाता है और उसे कुछ पता नहीं रह जाता कि मैं हूं भी या नहीं हूं? नींद का पता भी उसे तब चलता है, जब वह जागता है। तब उसे पता चलता है कि मैं सोया था। नींद मैं तो इसका भी पता नहीं चलता कि मैं सोया हूं। जब नहीं सोया था, तब पता चला था कि मैं सोने जा रहा हूं। जब तक जागा हुआ था, तब तक पता था कि मैं अभी जागा हुआ हूं, सोया हुआ नहीं हूं, जैसे ही सो गया, उसे यह भी पता नहीं चलता कि मैं सो गया हूं। क्योंकि अगर यह पता चलता रहे कि मैं सो गया हूं, तो उसका अर्थ है कि आदमी जगह हुआ है, सोया हुआ नहीं है। नींद चली जाती है तब पता चलता है कि मैं सोया था, लेकिन नींद में पता नहीं चलता कि मैं हूं भी या नहीं हूं। जरूर, मनुष्य को कुछ पता नहीं चलता है कि मैं हूं या नहीं, या क्या हूं, इसका एक ही अर्थ हो सकता है कि कोई बहुत गहरी अध्यात्मिक नींद, कोई स्प्रिचुअल हिप्नोटिक स्लीप, कोई आध्यात्मिक सम्मोहन की तंद्रा मनुष्य को गिरे हुए हैं। इसलिए उसे जीवन का ही पता नहीं चलता कि जीवन क्या है।...