दयापंथी कृप्टो नास्तिक ही हैं...

#दयापंथी_कृप्टो_नास्तिक_ही_हैं◆◆◆◆

#दयापंथी नास्तिकता फैलाने और ईश्वर के प्रति अनास्था लाने का धीमा डोज दे रहे हैं...

    #ईश्वर सबकुछ नहीं कर सकता... 

अपने आप को मार नहीं सकता..

अपने जैसा दूसरा ईश्वर नहीं बना सकता!!

ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो खुद को मारकर अपने जैसा दूसरा ईश्वर क्यों नहीं बनाता??

          ★★हद है ईश्वर खुद को दयापंथियों की शंकाएं मिटाने के लिए खुद को मारे और उन्हें संतुष्ट करने के लिए आत्महत्या करे और अपने जैसा दूसरा ईश्वर भी बनाये!!

   ईश्वर खुद को क्यूँ मारे?

ईश्वर अपने जैसा दूसरा ईश्वर क्यूं बनाये?

 ऐसी नौबत क्यूँ आये?

समाजी इसका जवाब दें.

        ईश्वर कोई चाबी से चलने वाला खिलौना है ???दयापंथी चाबी घुमायें और वह नाचने लगे!!

     #ईश्वर असंभव कार्यों को नहीं कर सकता!!!

  ■■■√ दयापंथी ये स्पष्ट करें कि वेद ईश्वर को सर्वशक्तिमान क्यूँ बताता है?

   #ईश्वर भक्त की नहीं सुनता बल्कि भक्त ईश्वर के वश में रहना चाहता है!क्यूँ???

   ¶¶¶√ईश्वर भक्त की नहीं सुनता तो भक्त ईश्वर की भक्ति क्यूं करे उसकी शरण में क्यूँ जाये?जबकि वह खाने पीने से बल और स्वविवेक से ज्ञान,ध्यान से समाधि,आनंद और मोक्ष भी पा सकता है. 

ईश्वर भक्त की नहीं सुनता तो भक्त उसकी भक्ति और उपासना क्यों करे?

   #ईश्वर भक्त की रक्षा कैसे करता है जैसे सवालों का घुमावदार, लच्छेदार जवाब देकर ईश्वर को कमजोर बताने का,नास्तिकता के खुराक परोसने का काम दयापंथी बड़ी चतुराई से करते हैं.दयापंथी नास्तिकता और आस्तिकता के बीच नपे तुले बैलेंस बैठाकर नास्तिकता के रथों को खींचने वाले जानवरों को हांक रहा है.ये नास्तिकता की पगडण्डी तैयार कर रहे हैं.

   क्योंकि नास्तिक भी ऐसी ही बातें दोहराते हैं कि ईश्वर नहीं सुनता,ईश्वर है ही नहीं तो सुनेगा कैसे?

ईश्वर की शरण में गए बगैर भी आनंद, शक्ति, बल और मानवीय मूल्यों को समझा जा सकता है. आस्तिक हुए बिना भी नेकी, सेवा, परोपकार संभव है तो ईश्वर के झमेले क्यूँ उठाया जाये???

     #दयापंथी और #नास्तिक दोनों ईश्वरीय चमत्कारों को खारिज करते हैं. जबकि विज्ञान भी डिवाईन मिरैकल सिरे से खारिज नहीं करता.

    दयापंथी ईश्वर पर संदेह खड़े करके आस्तिकों को चौराहे पर लाकर पटक रहा है जहाँ से आस्तिक(हिंदू विशेष)नास्तिकता की ओर झुक रहा है या ईसाईयत की ओर आकर्षित हो रहा है. क्योंकि ये हिंदू कर्म कांड,पूजन विधान और मूर्ति पूजा को पाखंड बताते हैं. आर्य समाज मिनी नास्तिकों फौज तैयार कर रहा है जिनके सिपाही दुराग्रह, पूर्वाग्रह, उच्च कोटि के गलौच शस्त्रों से लैस होकर आस्तिकों को मार रहे हैं.Published from Blogger Prime Android App

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