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परमेश्वर कौन है कहाँ है?

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परमेश्वर कौन है ? कौन चलाता है यह दुनियां को ??? कहाँ है ?? तुम माँ के पेट में थे नौ महीने तक, कोई दुकान तो चलाते नहीं थे, फिर भी जिए। हाथ—पैर भी न थे कि भोजन कर लो, फिर भी जिए। श्वास लेने का भी उपाय न था, फिर भी जिए। नौ महीने माँ के पेट में तुम थे, कैसे जिए? तुम्हारी मर्जी क्या थी? किसकी मर्जी से जिए? फिर माँ के गर्भ से जन्म हुआ, जन्मते ही, जन्म के पहले ही माँ के स्तनों में दूध भर आया, किसकी मर्जी से? अभी दूध को पीनेवाला आने ही वाला है कि दूध तैयार है, किसकी मर्जी से? गर्भ से बाहर होते ही तुमने कभी इसके पहले साँस नहीं ली थी माँ के पेट में तो माँ की साँस से ही काम चलता था— लेकिन जैसे ही तुम्हें माँ से बाहर होने का अवसर आया, तत्क्षण तुमने साँस ली, किसने सिखाया? पहले कभी साँस ली नहीं थी, किसी पाठशाला में गए नहीं थे, किसने सिखाया कैसे साँस लो? किसकी मर्जी से? फिर कौन पचाता है तुम्हारे दूध को जो तुम पीते हो, और तुम्हारे भोजन को? कौन उसे हड्डी—मांस—मज्जा में बदलता है? किसने तुम्हें जीवन की सारी प्रक्रियाएँ दी हैं? कौन जब तुम थक जाते हो तुम्हें सुला देता है? और कौन जब तुम्हारी नींद पूरी हो ज...

भड़काऊ दयानंद ने कहा गाय गधी के बराबर ही पशू है.. गोकरुणानिधि डामेज कंट्रोल के लिए रचा.

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दयानंद ने सन् १८७५ईस्वी में एक भड़काऊ किताब #सत्यार्थप्रकाश लिखा.       जिसमें उसने पृष्ठ ४५ में प्रातः सायं #माँसादि होम करने की बात कही है. पृष्ठ क्रमांक६७ में मलेच्छों की नई परिभाषा गढ़ी और कहा मलेच्छ निंदनीय नहीं हैं.     उनके अनुसार सही स्पष्ट उच्चारण नहीं कर सकने वाले #मलेच्छ हैं.😃      पृष्ठ क्रमांक १४८ में #गौमाता को गधी के बराबर बताया कि गाय तो पशु है सो पशु की क्या पूजा करना?? घास जलादि खिलाओ पिलाओ और दुहो पशु पालन का यही प्रयोजन है. ■पृष्ठ१५६ में बताया है कि माँस के पिण्ड देने में तो कुछ पाप नहीं.. ■पृष्ठ१७१ में लिखा है यज्ञ के वास्ते जो पशुओं की हिंसा है सो विधिपूर्वक हनन है ■पृष्ठ ३०२ में बताया है कि कोई भी माँस ना खाये तो जानवर पक्षी मत्स्य इतने हैं कि उनसे शत् सहस्त्र गुने हो जायें फिर मनुष्यों को मारने लगें और खेतों में धान्य ही ना होने पाये फिर सब मनुष्यों की आजीविका नष्ट होने से सब मनुष्य नष्ट हो जायें.. ■पृष्ठ ३०३ में लिखा है जहाँ जहाँ गोमेधादिक लिखे हैं वहाँ वहाँ पशुओं में नरों का मारना लिखा है.और तर्क दिया है कि एक बैल से हजारो...