भड़काऊ दयानंद ने कहा गाय गधी के बराबर ही पशू है.. गोकरुणानिधि डामेज कंट्रोल के लिए रचा.

दयानंद ने सन् १८७५ईस्वी में एक भड़काऊ किताब #सत्यार्थप्रकाश लिखा.
      जिसमें उसने पृष्ठ ४५ में प्रातः सायं #माँसादि होम करने की बात कही है.
पृष्ठ क्रमांक६७ में मलेच्छों की नई परिभाषा गढ़ी और कहा मलेच्छ निंदनीय नहीं हैं.
    उनके अनुसार सही स्पष्ट उच्चारण नहीं कर सकने वाले #मलेच्छ हैं.😃
     पृष्ठ क्रमांक १४८ में #गौमाता को गधी के बराबर बताया कि गाय तो पशु है सो पशु की क्या पूजा करना??
घास जलादि खिलाओ पिलाओ और दुहो पशु पालन का यही प्रयोजन है.
■पृष्ठ१५६ में बताया है कि माँस के पिण्ड देने में तो कुछ पाप नहीं..
■पृष्ठ१७१ में लिखा है यज्ञ के वास्ते जो पशुओं की हिंसा है सो विधिपूर्वक हनन है
■पृष्ठ ३०२ में बताया है कि कोई भी माँस ना खाये तो जानवर पक्षी मत्स्य इतने हैं कि उनसे शत् सहस्त्र गुने हो जायें फिर मनुष्यों को मारने लगें और खेतों में धान्य ही ना होने पाये फिर सब मनुष्यों की आजीविका नष्ट होने से सब मनुष्य नष्ट हो जायें..
■पृष्ठ ३०३ में लिखा है जहाँ जहाँ गोमेधादिक लिखे हैं वहाँ वहाँ पशुओं में नरों का मारना लिखा है.और तर्क दिया है कि एक बैल से हजारों गईयायें गर्भवती होती हैं.इससे हानि नहीं होती.😎
■आगे लिखा है-जो बन्ध्या गाय होती है उनसे दुग्ध और वत्सादिकों की उत्पत्ति नहीं होती.
■पृष्ठ ३६६ में लिखा है कि पशुओं को मारने में थोड़ा सा दुख होता है परन्तु यज्ञ में चराचर का अत्यंत उपकार होता है.
         इसके बाद उसने डामेज कंट्रोल के रूप में #गोकरुणानिधि लिखा जो परस्पर विरोधाभास उत्पन्न करती है.🤔

Comments

Popular posts from this blog

परमेश्वर झूठ बोलता है. शैतान को बनाने वाला भी वही है.

दयानन्द और गुप्त संस्था Freemason

प्रायश्चित्त करनेवालों ईश्वरीय अनुग्रह होती है.