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जीवन की संभावनाएं...

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*#जीवन_की_संभावनाएं*..       *जन्म के साथ जीवन नहीं मिलता, जन्म के साथ जीवन की केवल संभावना मिलती है. उस संभावना को वास्तविक बनाये बिना न कोई आनंद है,* *न कोई सुगंध है, ना बसंत है, ना फूल खिलते हैं, ना पक्षी गाते हैं ना सवेरा है..!!कुछ भी नहीं!*         *अंधेरा, उदासी,अवसाद,दर्द ही दर्द लोग इस भ्रांति में हैं कि जन्म पा लिया तो जीवन पा लिया.. जैसे कोई बीज को लिये बैठा रहे और फूल ,सुगंध और फल की इच्छा कर रहा हो!!*      *हलांकि बीज मेंं ही फूल,सुगंध और फल छुआ है. मगर जो छुपा है उसे प्रकट करना होगा जो अव्यक्त है उसे व्यक्त करना होगा...जो संभावित है उसे वास्तविक करना होगा, जो स्वप्न है उसे सत्य करना होगा...*      *बीज को सड़ना होगा तभी वह पुष्पित और फलित होगा..* यूहन्ना 12:24 []मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जब तक (गेहूं का) दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है।       *स्वयं जन्म लेना, फिर से जन्मना ही जीवन है.फिर से जन्मने का यह कतई मतलब नहीं कि फिर से गर्भ में जाया जाये...* *ईसा मसीह ने कई दफा कहा है."तुम्हें फिर से जन्मना होगा...

छः दिन में ही कर दी सृष्टि रचना. यह कहना गलत है।

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१◆सृष्टि रचना केवल छः दिन में हुई यह समझना गलत है. अधिकतर लोग शाब्दिक अर्थों को लेकर अनर्थ करते हैं. ।।बाईबल और सृष्टि विज्ञान।। उत्पत्ति की किताब में दिया ब्यौरा रहस्यमयी है जिसे बहुत ही सरल मगर दमदार शब्दों से शुरुआत किया गया है “आदि में परमेश्‍वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।” (उत्पत्ति 1:1) भूवैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि पृथ्वी करीब 4 अरब साल पुरानी है और खगोल वैज्ञानिकों ने हिसाब लगाया है कि विश्‍व करीब 15 अरब साल पुराना होगा। क्या विज्ञान की ये खोज, जिनमें आगे चलकर और भी फेरबदल हो सकते हैं, उत्पत्ति 1:1 में लिखी बात को काटती हैं? हरगिज़ नहीं.आईये जानें.   बाईबल में सृष्टि की रचना वृत्तांत में एक शब्द का बार बार जिक्र है... "#हो गया" इसी "हो गया"विस्फोटक शब्द को विज्ञान "बिग बैंग"कहता है.यही शब्द, वचन, तरंग ही सृष्टि का कारक है. (भारतीय दर्शन इसी वचन को #ऊँ बताती है) आदि में वचन ही था,जिसके द्वारा संपूर्ण ब्रह्मांड रचा गया.लेख को संक्षिप्त करते हुए आईये समझें.. किसी वस्तु को यदि टुकड़े टुकड़े किये जायें तो अणु से लेकर परमाणु से लेकर और टुकड़े किये जाय...