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Showing posts from September, 2023

सवर्णो के शोषण और अंग्रेजों के सुधार..

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#इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो बहुत कुछ सीखने को मिलता है। #अंग्रेजों ने राज करने के साथ-साथ कुछ परिवर्तन भी लाए हैं। जो कि इस प्रकार से है👇 #ब्राह्मण_जज_पर_रोक  सन 1919 ईस्वी में अंग्रेजों ने ब्राह्मणों के जज बनने पर रोक लगा दी थी, अंग्रेजों का कहना था कि इनका चरित्र न्यायिक नहीं होता। ये लोग हिंदू धर्म ग्रंथ मनुस्मृति वर्ण व्यवस्था जाति आधार पर न्याय करते हैं। #सरकारी_सेवाओं_में_प्रतिनिधित्व  अंग्रेजों ने शुद्र वर्ण की जातियों को सरकारी सेवाओं में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के माध्यम से प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की।  #गंगा_दान_प्रथा शूद्रों के पहले लड़के को ब्राह्मण गंगा में दान करवा दिया करते थे क्योंकि वो जानते थे कि पहला बच्चा हष्ट पुष्ट होता है। अंग्रेजों ने इस प्रथा को रोकने के लिए 1835 में एक कानून बनाया था।  #नववधू_शुद्धीकरण_प्रथा 1819 से पहले जब किसी शूद्र की शादी होती थी तो ब्राह्मण उसका शुद्धीकरण करने के लिए नववधू को 3 दिन अपने पास रखते थे, इस प्रथा को अंग्रेजों ने 1819 ईस्वी में बंद करवा दिया था। #सम्पत्ति_का_अधिकार  अंग्रेजों ने अधिनियम 11...

वेदों में इतिहास

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वेदार्थ करने में,देवता की भूमिका विषयवस्तु के रूप में है,विनियोग की भूमिका प्रयोजन के लिए है। किन्तु ऋषि का उल्लेख उस मन्त्र का इतिहास बताने जानने के लिए होता है। यही वेदों में सर्वत्र है। इन ऋषियों  मे भी केवल एक वर्ण के ऋषि नही चतुर्वर्णी नर नारी हैं जो चरणी,कूँडी,सोटा ,सिल ,बट्टा, दवा,बूटी , छलनी का भी प्रयोग करते कराते हैं।और दयापंथी कहते हैं वेदों में इतिहास ही नही है! प्राकृति भी इतिहास बयां करती है ... आज यह विधा जी़योलाजी कहलाती है।लेकिन दयापंथी इतिहास किसे मानते हैं,यह कोई नही जानता😎 गृत्समदेयों,माधुछान्सों,आत्रेयों,काण्वों,भार्गवों,आथर्वणों,सरमा,सर्पाक्षी आदि ऐतिहासिक ऋषि ऋषिकाओं के मंत्र कृत्यों से साबित होता है कि  वेदों में इतिहास है. अपने हिसाब से अर्थ अनर्थ करनेवाले दयापंथी  गाली गलौज और कोसना जानते हैं.      वेद मतलब ईजेन्दावेस्ता अवेस्ता के बहुत से हिस्सो और अथर्ववेद के मंत्रों के बीच भाषा, उच्चारण और कथ्य की जबरजस्त समानताएं मौजूद हैं। जरथुस्त्र के पिता का नाम पौरुषास्प् और उनके काबिले का नाम स्पितामा( पितामह) था । अवेस्ताई देवताओं के नाम...

अहिल्या ही दोषी क्यों??

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 प्रकरण में दयापंथी अभी तक निरुत्तर हैं.. गौतम ऋषि के शाप के प्रभाव से अहिल्या तीनों लोकों में अदृश्य हो गई.. सा हि गौतमवाक्येन दुर्निरीक्ष्या बभूव ह। त्रयाणामपि लोकानां यावद्रामस्य दर्शनमागता।।१-४९-१७           यहाँ वाल्मीकि रामायण से ही साबित हो रहा कि गौतम ऋषि थे ना कि चंद्रमा अहिल्या उसकी पत्नी थी.जिससे इंद्र ने व्याविचार किया. और नारी होने का दण्ड अहिल्या को मिला. इंद्र बच निकले. इस शाप से भगवान श्रीराम ने उद्धार किया. और अहिल्या ने भगवान राम के चरण स्पर्श किया. पैर धोने के लिए जल दिया. #पाद्यमर्घ्यं_तथातिथ्यं_चकार_सुसमाहिता।।     दयापंथी  डामेज कंट्रोल की नकाम कोशिश कर रहे हैं. सत्य स्वीकारें सत्यग्रही बनें. विष्ठाग्रह त्यागें #मनुर्भव।।