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Showing posts from April, 2023

जागते रहो

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#जागते_रहो●●● #जीसस को सोये हुए लोगों ने इसलिए सूली पर लटका दिया क्योंकि जीजस उनकी नींद में खलल थे. जीजस का कसूर इतना था कि वो जागे हुए थे और सोये हुओं को जगाते थे.            जीवन बीत जाता है और आनंद की झलक भी नहीं मिलती। आदम जात को होश में नहीं कहा जा सकता है.वह अलसाया है दुख,चिंता,पीड़ा,चिंता,उदासी,ईर्ष्या द्वेश और पागलपन से जूझ रहा.         लोगों अपने पागलपन का नींद में होने पता इसलिए नहीं चलता क्योंकि उनके चारों तरफ भी उन्हीं के जैसे ही सोए हुए लोग हैं। और कभी अगर एकाध जागा हुआ इंसान पैदा होता है, तो सोए हुए लोगों को इतना क्रोध आता है कि लोग बहुत जल्द ही उस इंसान की हत्या कर देते हैं। लोग ज्यादा देर तक उसे बर्दाश्त नहीं करते। सोए हुए लोगों को जाग्रित देखकर सोये हुए लोग परेशान होते हैं.जागने वालों की मौजूदगी सोये हुओं की नींद में बाधा डालती है।इसीलिए सोनेवाले अंधेरा पसंद लोग हत्या की षड्यंत्र रचते हैं.लोग आज भी जगाने वालों से चिढ़ते हैं.नींदी लोग जागे हुए आदमियों के साथ वही व्यवहार करते हैं, जो पागलों की बस्ती में उस आदमी के साथ होगा,...

यीशु को जिस दिन क्रूस पर लटकाया गया उस दिन को ईसाई गुड फ्राईडे क्यों कहते हैं??

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#जिस_दिन_यीशु_लटकाया_गया_उस_दिन_ईसाई_गुड_फ्राईडे_क्यों_कहते_हैं!?? *#गुड_फ्राइडे_क्या_है ???* कई लोगों का ऐसा मानना है की, '#गुड_फ्रायडे' ईसाइयों का एक त्योहार है, जो यीशु मसीह के क्रूस पर मारे जाने के स्मरण में मनाया जाता है. पर क्या सच्चाई इस बात तक ही सिमित है? जी, बिल्कुल नहीं. '#गुड_फ्रायडे' के निमित्त कुछ अहम सच्चाईयाँ #गुड_न्यूज यह है.... कि, 'गुड फ्रायडे' में संसार के हर एक मनुष्य के पाप कर्मों की भरपाई या मुआवजा है. बाईबिल जताता है : "कोई अपने भाई को किसी भी तरीके से छुड़ा नहीं सकता है -- क्योंकि आत्मा की छुड़ौती भारी है,बड़ा कठिन है कि दूसरों के दण्ड को अपने सर पर लिया जाये.वह अंत तक कभी न चुका सकेंगे -- कोई ऐसा नहीं जो सदैव जीवित रहे, और कब्र का मुँह न देखे."                      यह सवाल अक्सर पूछे जाते हैं कि, हम मनुष्य सदा जीवित क्यों नहीं रह पाते? मौत ने हम पर अपना शिकंजा क्यों कसा है? मौत को हम हरा क्यों नहीं पाते? मोक्ष कैसे संभव है?मुक्ति कैसे मिलेगी? इन प्रश्नों का ...

सत्य और दयानन्द

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#जो_जैसा_है_उसे_ठीक_वैसा_ही_कहना_सत्य_है●●● फिर दयानन्द और दयापंथी संदिग्धज्ञान को ही अंतिम सत्य क्यूँ प्रचारते हैं?? " जिस समय मैने यह ग्रन्थ बनाया था उस समय और उससे पूर्व संस्कॄत भाषण करने ,पठन,पाठन में संस्कॄत ही बोलने और जन्मभूमि की भाषा गुजराती होने के कारण मुझको इस भाषा का विशेष ज्ञान नही था ." _ स्वामी दयानन्द (द्वितीय संस्करण) यहाँ यह बात स्पष्ट है कि स्वामीजी को हिंदी का समुचित ज्ञान नही था , जिस समुचित दो भाषा का ज्ञान स्वामीजी को था उनमें गुजराती और क्षेत्रीय भाषा थी और संस्कॄत आम बोलचाल की भाषा नहीं थी. यहाँ यह सवाल पैदा होता है कि स्वामीजी ने 'सत्यार्थ प्रकाश ' से पहले हिंदू,जैन, बौद्ध , ईसाई आदि धर्मों की पुस्तकों का अध्ययन किया तो वह किस भाषा में किया ...?? यहां यह भी विचारणीय है कि किसी नई भाषा सीखने वाला व्यक्ति साहित्यिक दृष्टी से संभल कर बोलेगा और लिखेगा न कि उस भाषा की गाली गलौच और अभीष्ट शब्द सीखेगा ..!!! किसी विद्वान और धार्मिक व्यक्ति की भाषा कभी मर्यादाहीन ,अहंकार पूर्ण और विद्वेष पूर्ण नही होती . 'सत्यार्थ प्रकाश' ...

कौन कहता है वेदों में इतिहास नहीं है??

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#वेदों_में_इतिहास_नहीं_है_यह_कहना_सरासर_गलत_है वेदार्थ करने में,देवता की भूमिका विषयवस्तु के रूप में है,विनियोग की भूमिका प्रयोजन के लिए है। किन्तु ऋषि का उल्लेख उस मन्त्र का इतिहास बताने जानने के लिए होता है। यही वेदों में सर्वत्र है। इन ऋषियों  मे भी केवल एक वर्ण के ऋषि नही चतुर्वर्णी नर नारी हैं जो चरणी,कूँडी,सोटा ,सिल ,बट्टा, दवा,बूटी , छलनी का भी प्रयोग करते कराते हैं।और दयापंथी कहते हैं वेदों में इतिहास ही नही है! प्राकृति भी इतिहास बयां करती है ... आज यह विधा जी़योलाजी कहलाती है।लेकिन दयापंथी इतिहास किसे मानते हैं,यह कोई नही जानता😎 गृत्समदेयों,माधुछान्सों,आत्रेयों,काण्वों,भार्गवों,आथर्वणों,सरमा,सर्पाक्षी आदि ऐतिहासिक ऋषि ऋषिकाओं के मंत्र कृत्यों से साबित होता है कि  वेदों में इतिहास है. अपने हिसाब से अर्थ अनर्थ करनेवाले दयापंथी  गाली गलौज और कोसना जानते हैं.      वेद मतलब ईजेन्दावेस्ता / अवेस्ता के बहुत से हिस्सो और अथर्ववेद के मंत्रों के बीच भाषा, उच्चारण और कथ्य की जबरजस्त समानताएं मौजूद हैं। जरथुस्त्र के पिता का नाम पौरुषास्प् और उनके काबिले का न...