Posts

Showing posts from August, 2023

वेदों में विज्ञान प्रौद्योगिकी कहाँ है??

Image
#वेद_और_विज्ञान ◆◆◆     अक्सर ऐसे भी दावे सुनने को मिलते हैं कि वैदिक काल के दीर्घात्मा ऋषि यह जानते थे कि सूर्य की ऊर्जा का स्रोत ताप नाभिकीय अभिक्रिया है। जयंत विष्णु नार्लीकर अपने एक आलेख में लिखते हैं कि अगर हम इस वर्णन को स्वीकार कर भी लें, तो भी इससे यह पता नहीं चलता कि सूर्य की आंतरिक संरचना कैसी है, किस प्रकार से यह संतुलन में रहता है या किस प्रकार इसकी ऊर्जा इसके केंद्र से सतह तक आती है आदि। इन सारी बातों को जानने के लिए वर्तमान में हम गुरुत्वाकर्षण, विद्युत् और चुम्बकत्व और द्रवस्थैतिकी का सहारा लेते हैं। क्या वेदों में इसका विवरण मिलता है? संक्षिप्त उत्तर है- नहीं।       एक बार डॉ. साहा ढाका गए, तो वहां के एक वकील ने उनकी खोज (तापीय आयनीकरण) के बारे में उनसे जानकारी चाही। साहा उन्हें विस्तार से तारों की संरचना और अपनी नई खोज के बारे में समझाते चले गए। मगर वकील महाशय बीच-बीच में टिप्पणी करते रहे कि, “लेकिन इसमें तो कुछ नया नहीं है, यह सब तो हमारे वेदों में है।” अंत में साहा ने उनसे पूछा : बताइए कि वेदों में ठीक-ठीक कहाँ पर तारों के आयनीकरण के बारे...

क्या वेदों में विज्यान है??

Image
 यह एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि अधिक दिनों तक पराधीन पिछड़े रहने वाले राष्ट्रों में अपने अतीत काल को लेके ऐसी गौरवमय भावना बैठ जाती है जो सिवाय भ्रम के कुछ नहीं होती ।गौरवमय इतिहास की कल्पना पराधीन राष्ट्र के लोगो को जीने में उत्साह भरता है इससे पराधीन होने की हीनता कम होती है  , और देखा जाये गलत भी नहीं।परन्तु यदि राष्ट्र आजाद हो जाता है उसके बाद भी उसी  प्रकार की काल्पनिक इतिहास के गुण गाते रहना निश्चित ही उस समाज की मनोदशा पर प्रश्नचिन्न लगा देता है  जब भारत पर इस्लामिक आक्रमणकारी आये तो वे अपने साथ आधुनिक अविष्कार नहीं लाये ,या लाये भी तो नाम मात्र का जैसे की बारूद का प्रयोग ।चुकी ये भारतीय समाज के सभी वर्गों के उपयोग में नहीं था इसलिए इस पर समाज का ज्यादा ध्यान नहीं गया ।चुकी अधिकतर मामलो में भारतीय ज्ञान अरबी ज्ञान से अधिक ही था तो इस्लामिक सत्ता के दौरान पराधीन रह के भी इतनी हीनता  का अहसास नहीं हुआ । परन्तु जब अंग्रेज भारत आये तो अपने साथ उच्च तकनीक लेके आये , उच्च शिक्षा लेके आये , उच्च अविष्कार लेके आये ।उनकी पराधीनता के दौरान भारतीयो को अहसास हुआ की जिस...

वेद और विज्यान..

Image
#वेद_और_विज्ञान ◆◆◆     अक्सर ऐसे भी दावे सुनने को मिलते हैं कि वैदिक काल के दीर्घात्मा ऋषि यह जानते थे कि सूर्य की ऊर्जा का स्रोत ताप नाभिकीय अभिक्रिया है। जयंत विष्णु नार्लीकर अपने एक आलेख में लिखते हैं कि अगर हम इस वर्णन को स्वीकार कर भी लें, तो भी इससे यह पता नहीं चलता कि सूर्य की आंतरिक संरचना कैसी है, किस प्रकार से यह संतुलन में रहता है या किस प्रकार इसकी ऊर्जा इसके केंद्र से सतह तक आती है आदि। इन सारी बातों को जानने के लिए वर्तमान में हम गुरुत्वाकर्षण, विद्युत् और चुम्बकत्व और द्रवस्थैतिकी का सहारा लेते हैं। क्या वेदों में इसका विवरण मिलता है? संक्षिप्त उत्तर है- नहीं।       एक बार डॉ. साहा ढाका गए, तो वहां के एक वकील ने उनकी खोज (तापीय आयनीकरण) के बारे में उनसे जानकारी चाही। साहा उन्हें विस्तार से तारों की संरचना और अपनी नई खोज के बारे में समझाते चले गए। मगर वकील महाशय बीच-बीच में टिप्पणी करते रहे कि, “लेकिन इसमें तो कुछ नया नहीं है, यह सब तो हमारे वेदों में है।” अंत में साहा ने उनसे पूछा : बताइए कि वेदों में ठीक-ठीक कहाँ पर तारों के आयनीकरण के बारे...