बाईबल और सृष्टि विज्ञान
।।बाईबल और सृष्टि विज्ञान।।
उत्पत्ति की किताब में दिया ब्यौरा रहस्यमयी है जिसे बहुत ही सरल मगर दमदार शब्दों से शुरुआत किया गया है “आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।” (उत्पत्ति 1:1)
भूवैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि पृथ्वी करीब 4 अरब साल पुरानी है और खगोल वैज्ञानिकों ने हिसाब लगाया है कि विश्व करीब 15 अरब साल पुराना होगा। क्या विज्ञान की ये खोज, जिनमें आगे चलकर और भी फेरबदल हो सकते हैं, उत्पत्ति 1:1 में लिखी बात को काटती हैं? हरगिज़ नहीं.आईये जानें.
बाईबल में सृष्टि की रचना वृत्तांत में एक शब्द का बार बार जिक्र है...
"#हो गया" इसी "हो गया"विस्फोटक शब्द को विज्ञान "बिग बैंग"कहता है.यही शब्द, वचन, तरंग ही सृष्टि का कारक है. (भारतीय दर्शन इसी वचन को #ऊँ बताती है) आदि में वचन ही था,जिसके द्वारा संपूर्ण ब्रह्मांड रचा गया.लेख को संक्षिप्त करते हुए आईये समझें.. किसी वस्तु को यदि टुकड़े टुकड़े किये जायें तो अणु से लेकर परमाणु से लेकर और टुकड़े किये जायें तो अंतिम सुक्ष्म टुकड़े चमकदार रश्मियों में परिवर्तित होंगी. आदि में सभी पदार्थ इन्हीं रश्मि पुंजों में एक केंद्र पर विद्यमान थी. पदार्थ के रूप में वजूद आने के लिए रश्मि पुंजों पर कारक दैर्घ्य, तरंग, शब्द या वचन उत्पेरक हुआ. यहीं विस्फोट हुआ और सृष्टि का आरंभ हुआ. और जैसा बाईबल कहती है "हो गया"आदि में वचन था वचन परमेश्वर के साथ था. और वचन से ही सब कुछ हो गया.बाईबल की समझ न रखने वाले अक्सर आक्षेप करते हैं कि सृष्टि की रचना मात्र छ:दिनों में कैसे हुई?सूरज,चांद और नक्षत्र चौथे दिन सृजे गए तो दिन और रात कैसे संभव हुआ??
बहुत से विश्वासी भी छ:दिन वाली सृष्टि वृत्तांतों को शब्दशः लेकर चलते हैं. जबकि बाईबल के अध्ययन से स्पष्ट होता है ये दिन लंबी अवधियाँ हैं.
सच तो यह है कि जिस इब्रानी शब्द का अनुवाद “दिन” किया गया है, उसका मतलब सिर्फ 24 घंटे नहीं बल्कि अलग-अलग समय-अवधि है। मिसाल के लिए, मूसा ने जब परमेश्वर के सृष्टि के कामों का निचोड़ दिया, तो उसने पूरे छः दिनों को एक दिन कहा। (उत्पत्ति 2:4) इसके अलावा, सृष्टि के पहले दिन “परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा।” (उत्पत्ति 1:5) इस आयत में, 24 घंटों में से कुछ घंटों के लिए शब्द “दिन” इस्तेमाल किया गया है। इन सब मिसालों से साफ पता चलता है कि बाइबल यह नहीं सिखाती कि सृष्टि का हर दिन 24 घंटे का था बल्कि यह लोगों की दिमागी-उपज है।
सूरज चाँद और नक्षत्रों की सृष्टि के बाद ही काल या समय की गणनाएं शूरु हुईं कि वे समय, मौसम चक्र का नियम फॉलो करें.उत्पत्ति 1:14
[14]फिर परमेश्वर ने कहा, दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों; और वे चिन्हों, और नियत समयों, और दिनों, और वर्षों के कारण हों।
सृष्टि के पहले “दिन” के ब्यौरे में उजियाले के लिए जो इब्रानी शब्द इस्तेमाल किया गया है, वह है ऑर जिसका आम तौर पर मतलब है, रोशनी। लेकिन चौथे “दिन” के ब्यौरे में जो इब्रानी शब्द इस्तेमाल किया गया है, वह है माऑर जिसका मतलब है, ज्योति जिससे रोशनी निकलती है।इन सारी बातों से साफ है, बाइबल की मूल भाषा में लिखा ब्यौरा इस बात की गुंजाइश छोड़ता है कि हर “दिन” या सृष्टि की समय-अवधि में कुछ खास घटनाएँ अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे घटीं.
सृष्टि रचना की बिग बैंग थ्योरी और प्रलय या विनाश की बिग क्रंच थ्योरी बाईबल आधारित है. सृष्टि से पूर्व ब्रह्मांड शून्य एक बिंदु था और और प्रलय के बाद भी ब्रह्मांड का संपूर्ण मॉस एक बिंदु पर ही सिकुड़ जायेगा. एक नई सृष्टि के इंतजार मेंं......
क्योंकि लिखा हैयशायाह 65:17
[17]क्योंकि देखो, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी उत्पन्न करने पर हूं, और पहिली बातें स्मरण न रहेंगी और सोच विचार में भी न आएंगी।यशायाह 66:22

[22]क्योंकि जिस प्रकार नया आकाश और नई पृथ्वी, जो मैं बनाने पर हूं, मेरे सम्मुख बनी रहेगी, उसी प्रकार तुम्हारा वंश और तुम्हारा नाम भी बना रहेगा; यहोवा की यही वाणी है।🙏
//आलोक//
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