जीवन का शिखर


     *दरअसल #मृत्यु जीवन के शिखर पर खिलने वाला फूल ही है. इस फूल की कद्र अलग अलग तरीकों से होती है.शवयात्रा में निकले लोगों की तादाद देखकर यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसने कितने रिश्तों की कमाई करी है लेकिन #कोरोना ने इस परंपरा को भी तोड़ दिया है. अब लोगों को हर परंपरागत पद्धतियों को भी बदलनी ही होगी.*Published from Blogger Prime Android App
       *अंतिम संस्कार, अस्थि कलश विसर्जन विधि,मृत्यभोज,विवाह भोज,धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन सारी विधियाँ #कोरोना ने बदल दिया है.*
        *जब कोई मरता है तो हम सहानुभूति और संवेदना व्यक्त करते हैं और हमें लगता है बेचारा मर गया लेकिन हमारे मन में यह कभी नहीं आता उसकी मृत्यु हमारी भी मृत्यु है. बड़ी सूक्ष्म बातें हैं जहाँ तक हम पहुँचते भी नहीं हैं.*
       *हमें लगता है हम बचकर निकल लेंगे.... हम सोचते हैं कुछ न कुछ हमें बचा लेगा.. कोई मंत्र,कोई साधना, कोई प्रार्थना,कोई चमत्कार..कुछ तो ऐसा लगता होगा जो हमें बचा लेगा...*
      *हमें समझना होगा कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं वह तो जीवन का शिखर है.*
      *हम खुद को ना छलें कि हमारा बैंक बैंलेंस, संग्रहित धन हमें मृत्यु से बचा लेगा...*
    *यदि दण्ड ईश्वर की ओर से हो तो हम चहारदीवारी के अंदर भी हों बच नहीं सकते.*
*आलोक कुजूर*🙏🙏🙏
“इस स्थान में विवाह करके बेटे-बेटियाँ मत जन्मा। क्योंकि जो बेटे-बेटियाँ इस स्थान में उत्पन्न हों और जो माताएँ उन्हें जनें और जो पिता उन्हें इस देश में जन्माएँ, उनके विषय यहोवा यह कहता है, *वे बुरी-बुरी बीमारियों से मरेंगे। उनके लिये कोई छाती न पीटेगा, न उनको मिट्टी देगा; वे भूमि के ऊपर खाद के समान पड़े रहेंगे। वे तलवार और अकाल से मर मिटेंगे, और उनकी लोथें आकाश के पक्षियों और मैदान के पशुओं का आहार होंगी। “यहोवा ने कहा: जिस घर में रोना पीटना हो उसमें न जाना, न छाती पीटने के लिये कहीं जाना और न इन लोगों के लिये शोक करना; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है कि मैंने अपनी शान्ति और करुणा और दया इन लोगों पर से उठा ली है। इस कारण इस देश के छोटे-बड़े सब मरेंगे, न तो इनको मिट्टी दी जाएगी, न लोग छाती पीटेंगे, न अपना शरीर चीरेंगे, और न सिर मुँण्ड़ाएँगे। इनके लिये कोई शोक करनेवालों को रोटी न बाटेंगे कि शोक में उन्हें शान्ति दें;*
यिर्मयाह 16:2-6
तू भोज के घर में इनके साथ खाने-पीने के लिये न जाना। क्योंकि सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यह कहता है: देख, तुम लोगों के देखते और तुम्हारे ही दिनों में मैं ऐसा करूँगा कि इस स्थान में न तो हर्ष और न आनन्द का शब्द सुनाई पड़ेगा, न दुल्हे और न दुल्हन का शब्द। (प्रका. 18:23)  तो तू इन लोगों से कहना, ‘यहोवा की यह वाणी है, क्योंकि तुम्हारे पुरखा मुझे त्याग कर दूसरे देवताओं के पीछे चले, और उनकी उपासना करके उनको दण्डवत् की, और मुझ को त्याग दिया और मेरी व्यवस्था का पालन नहीं किया, और जितनी बुराई तुम्हारे पुरखाओं ने की थी, उससे भी अधिक तुम करते हो, क्योंकि तुम अपने बुरे मन के हठ पर चलते हो और मेरी नहीं सुनते;

यिर्मयाह 16:2-8-9, 11-12Published from Blogger Prime Android App

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