आर्य समाजी लैव्यवस्था के विधानों और तात्कालिक कायदों को लेकर निम्न समीक्षा आक्षेप पेश करते हैं..
(समीक्षक) तनिक विचारिये!
कि बैल को परमेश्वर के आगे उसके भक्त मारें
और वह मरवावे
और लोहू को चारों ओर छिड़कें,
अग्नि में होम करें,
ईश्वर सुगन्ध लेवे,
भला यह कसाई के घर से कुछ कमती लीला है?
इसी से न बाइबल ईश्वरकृत है
और न वह जंगली मनुष्य के सदृश लीलाधारी ईश्वर हो सकता है.?
इस संदर्भ को समझने के लिए जरा पीछे आदम का पहला गुनाह नफरमानी और परमेश्वर की पाप क्षमा की युक्तियों को जानना होगा.आदम के द्वारा पाप हुआ.इस पाप का परिणाम यह हुआ कि आदम यह जान पाया वह नंगा है और अपने तन को छुपाने के लिए झुरमुटों का सहारा लिया. परमेश्वर ने उसके नग्नता को ढंपने के लिए उसके तन पर जानवर की खाल प्रबंध किया. खाल का प्रबंध हुआ मतलब कोई जानवर मरा होगा.और मरा होगा तो निश्चय खून बहा होगा. इस तरह आदम के पहले पापों की क्षमा और उसकी नग्नता ढंपने के लिए लहू बहा.और आदम की सारी संतानों के पाप क्षमा और मेल के लिए निर्दोष मेमने, मेढ़े,बछड़े का लहू बहाने और यज्ञ का विधान लैव्यवस्था में भी जिक्र है. पाप क्षमा और श्राप से मुक्ति के लिए यही विधान हिंदुओं, यहूदियों, मुसलमानों में आज भी बदस्तूर चला आ रहा है.
ईसाईयत अब बलि प्रथा और निर्दोष जानवरों की बलि का समर्थन नहीं करता न ही जायज ठहराता है. क्योंकि निर्दोष ईसा ने संपूर्ण मानव जाति की पापों की क्षमा और उद्धार के लिए अपना कतरा कतरा लहू बहा दिया है अब किसी मेढ़े ,बछिया, बकरे के लहू की आवश्यकता नहीं है.अत:ईसा की कुर्बानी के बाद किसी निर्दोष जानवरों का लहू बहाना जायज नहीं. ईसाई अब ऐसे कामों से परहेज करता है और मजम्मत भी करता है.
ऐसे में आर्य समाजियों का आक्षेप मात्र उनकी नासमझी और दुराग्रह ही समझी जायेगी.
आर्य समाजियों को अक्सर छटपटाते और मचलते देखा गया है. ये कभी हिंदुत्व पर हाय तौबा करते हैं कभी ईसाईयत को कोसते नजर आते हैं और कभी इस्लाम पर गलौच करते नजर आते. जबकि वेदों,पुराणों और हिंदू शास्त्रों में भी पाप क्षमा और मनोकामना पूर्ति हेतु जानवरों की बलि का जिक्र है.वेदों और हिंदू शास्त्रों में मांसाहार को पाप नहीं बताया गया है.यज्ञों में बलि पशु होते थे.दक्ष के यज्ञ देखें जहाँ उसकी पुत्री सती हुई थी

यति नरसिंहानंद सहित तमाम धरमाचार्यों नेे इसे माना है
यज्ञों और हवन सामग्रियों में धृत,अनाज, लोहबान, धूप,मांसादि का उल्लेख मिलता है.
क्या पशु स्वत नहीं मरते है क्या मारना अनिवार्य था क्या आप स्नान घर में नग्न नहीं रहते तब नग्नता पर क्या फर्क पड़ता है क्या आदम के समय समय अनेक व्यक्ति और थे फिर पशु की बलि क्यों ली गयी क्या यहोवा कम बुद्धि वाला था
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