देहधारी ईश्वर..

देहधारी ईश्वर


        जो अपने आप को ईश्वर और मसीहा कहते हैं और फिर भी परमेश्वर के कार्य नहीं कर सकते वे सभी धोखेबाज हैं.

           मसीह पृथ्वी पर केवल परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं है बल्कि वह देह है, जिसे धारण करके परमेश्वर लोगों के बीच रहकर कार्य पूर्ण करता है. यह वह देह नहीं, जो किसी भी मनुष्य के द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सके,बल्कि वह देह है जो परमेश्वर के कार्य को पृथ्वी पर बेहतर संपादित करता है. और परमेश्वर के स्वभाव को अभिव्यक्त करता है साथ ही अच्छी प्रकार से परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करता है. और मनुष्य के जीवन को एक रास्ता देता है जो मृत्यु के बाद भी भव्य बनाता है.परमेश्वर ने अपने वायदे के अनुसार मनुष्यों के बीच वास किया.उस समय बहुत सी जातियाँ यहोवा से मिल जाएँगी, और मेरी प्रजा हो जाएँगी; और मैं तेरे बीच में वास करूँगा,

जकर्याह 2:11

          मनुष्य कई युगों को जीता आया है. कलयुग के बाद आज जिस युग में मनुष्य जी रहा है वह #अनुग्रह का युग है. इसी अनुग्रह के युग के लिए आज से दो हजार साल पहले परमेश्वर ने मनुष्य के उद्धार और बुराई, पाप के छुटकारे के लिए मसीह के रूप में देहधारण किया

       मनुष्य अपनी नंगी आँखों से परमेश्वर की संपूर्ण दिव्यता को नहीं देख सकता,सिर्फ़ परमेश्वर द्वारा किये गए कार्यों और अभिव्यक्त संवाद, सत्य तथा परमेश्वर द्वारा प्रकाशित बुद्धिमत्ता, ज्ञान और अस्तित्व से परमेश्वरानुभूति की पुष्टि स्पष्ट होती है. बाहर से देखने पर देहधारी परमेश्वर एक सामान्य साधारण व्यक्ति है जो बिल्कुल भी बुलंद और अलौकिक नहीं है फिर भी देहधारी परमेश्वर का सार दिव्यता और उसके असाधारण कार्य व्यवहार हैं...

✝ आलोक✝


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