बोझ..
बोझ●●●
इंसान अपने अभिमान का बोझ ढोता फिर रहा है.जबकि लिखा है.अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा
भजन संहिता 55:22
हम अपना बोझ छोड़ना नहीं चाहते. अहंकार,अभिमान घमंड,शिकवे,शिकायत, झूठ,झगड़े, ईर्ष्या डाह,घृणा...आदि आदि बुराईयों का बोझ हम ढोकर चल रहे हैं!!?श्रेय लेना किसको पसंद नहीं है?अभिमान और घमंड किस बात के लिए??
जान लें..
नाश होने से पहले मनुष्य के मन में घमण्ड, और महिमा पाने से पहले नम्रता होती है।
नीतिवचन 18:12
नाम और शौहरत की चाहत सबको होती है. श्रेय के साथ #मैं जुड़ा होता है..
मैं दौलतमंद हूँ...
मैं ताकतवर हूंँ..
मैं कामयाब हूँ.
मैं दूसरों से बेहतर हूँ..
जहाँ मैं है वहाँ अहम् घमण्ड है.आज धार्मिक आध्यात्मिक क्षेत्रों में भी #मैं घुस आया है.
मैं धर्मी हूँ..
मैं दूसरों से ज़ियादा धर्म जानता हूँ.
मैं धर्म शास्त्रों का ज्ञाता हूँ.
जहाँ #मैं है वहाँ *मैं* [परमेश्वर] नहीं है.
कैन ने एक शहर बसाया , और उसका नाम अपने बेटे के नाम पर रखा.उत्पत्ति 4:17
इसमें कोई बुराई नहीं है , हम भी आज ,घरों के नाम अपने नाम पर रखते हैं.मगर हम श्रेय किसको देते हैं, ख़ुद को या ख़ुदा को?
हम दुनिया को क्या पैग़ाम देना चाहते हैं? आपका नाम ख़ुदा के पहले आता है या बाद में?
ग़ालिब ने क्या ख़ूब लिखा है
#कुछ_न_था_तो_ख़ुदा_था
#कुछ_ना_होता_तो_ख़ुदा_होता.
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