नास्तिकों को जवाब..


आत्मा कपोल कल्पित चीज है।न आत्मा नाम की कोई चीज है न इसका वजूद है।

एक शरीर के मर जाने के बाद आंखें कुछ घंटों तक जीवित रहती हैं क्या आंख और शरीर के लिए अलग अलग आत्मा होती है?क्या शरीर से जुड़े जुड़वां बच्चों की आत्मा अलग अलग हैया एक?छिपकली की पूंछ कटने पर पूंछ अलग छटपटाती है क्या पूंछ मे एक और आत्मा है?क्लोन बनाकर और अंग प्रत्यर्पण की तकनीक विकसित कर वैज्ञानिक आत्मा होने के वजूद को झुठला दिया है।शरीर के किसी अंग के कट जाने पर आत्मा क्यों नहीं निकलती जबकि गर्दन कटते ही निकल जाती है?

      आत्मा है तो प्रमाण क्या है?

"नैनम् छिंदंति शसत्राणि,नैनम् दहति पावकः"

       तो फिर नर्क मे किसे तला भूना जाता है?किसे आरी से काटा जाता है?ऐसे तमाम नास्तिक वादी सवाल आप जोड़ सकते हैं....।।

                 अजी निश्चय आत्मा का वजूद है...

आईये गौर करें।

                  मानव शरीर के तीन लेयर्स हैं:

१:शरीर(Body)सभी अंगों सहित।

२:प्राण, दम,जान(breath vitality/life.

३:आत्मा(soul, spirit)Published from Blogger Prime Android App

शरीर की तमाम भौतिक आवश्यकताएं हैं शरीर नश्वर है।इसी शरीर को पोषित और फलित करने के लिए इंसान आराम त्याग कर आराम की तलाश मे कुशल धावक की तरह दौड़ लगा रहा है।शरीर लौकिक, सांसारिक, मिट्टी है. मिट्टी मे तब्दील हो जायेगा. प्राण के बिना आप(रामू,श्यामू,रहीम.....)नहीं आप मात्र बॉडी हो.

                  प्राण के लिये आहार, जल,वायु जरूरी है. प्राण आपकी बॉडी को क्रियाशीलता प्रदान करता है।आहार, जल,वायु के बिना आपकी जान(प्राण)जायेगी।

                    ये जान लें मौत का सीधा संबंध शरीर से है नकि आत्मा से।शरीर के मरने पर सर्वप्रथम आपकी जान(प्राण)जाती है शरीर ठंडा पड़ने लगता है. शरीर की सारी ऊष्मा जाते ही आत्मा शरीर का साथ छोड़ देती है

आत्मा ऊर्जा है, ताप है, आंच है, विवेक का.स्त्रोत है।जब तक शरीर मे आत्मा है शरीर मे आभाहै ताप है, विद्युत है. मौत शरीर को ठंडा कर देती है शरीर के ठंडा पड़ जाने या आत्मा का साथ छोड़ जाने के बाद अंग प्रत्यर्पण संभव नहीं।कोशिका वर्धन कर,क्लोन बनाकर प्राण स्थापित किया जा सकता है. आत्मा नहीं।क्योंकि

                           आत्मा शरीर का वह आयाम है जो आपको मूल से जोड़ता है और मूल"परमात्मा"है।आत्मा जमीर है अंत: ध्वनि है. आत्मा पुकारती है जिसके कान हों सुन ले...

आत्मा स्व "मैं"का भाव जगाता है दया, प्रेम, स्व"भाव से आत्मा पोषित और फलित होता है आध्यात्म से प्रबल होता है।इसके बिना आत्मा कुपोषित है।

आत्मा=Emotional or intellectual energy or intensity....

आत्मा शक्ति, ऊर्जा विद्युत का सूक्ष्म औरविवेक का वृहद संयोजन है

आत्मा के बिना हमारा शरीर उस बल्ब की तरह है जिसमें करंट नहीं, बिना सॉफ्टवेयर के कांप्युटर तरह है इसका प्रमाण आप खुद हो.अपने विवेक का सही इस्तेमाल करो.

यदि आप दया करते हैं, प्रेम करते हैं तो आपमे ऊर्जा है, ऊष्मा है आत्मा है.

स्वयं के होने का प्रमाण आप कैसे देंगे??Published from Blogger Prime Android App

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