शूल या फूल..??
अगर गड्ढे खोदने वालों के लिए गड्ढे खोदे जायें तो धरती गड्ढों से भर जायेगी, कांटे बिछाने वालों के लिए कांटे बिछाये जायें तो धरती कांटों से पट जायेगी....
ईसा मसीह उस समय इस धरती पर तशरीफ़ लाये जिस समय छोटी छोटी बातों के लिए घात किया जाता था, जरा सी बात के लिए पत्थर,लठैत, हथियार उठाये जाते थे. एक वाकया याद आता है नगरवधू व्याविचार करते पकड़ी गई. भीड़ उस महिला को ईसा के पास ले आई. परखने के लिए महिला पर पत्थर वाह की मांग करने लगे.ईसा ने कहा"जो निष्पाप हो वही पहला पत्थर चलाये"भीड़ एक एक करके सरकती गई. यहाँ कौन निष्पाप है??लेकिन तौभी हमें दूसरों की खामियां ढूंढने से फुर्सत नहीं. धर्म का दिखावा करके लोग किसे छल रहे हैं?ईसा को यही दिखावा करनेवाले ढोंगी कथित धर्म अगुवे षड्यंत्रों से सूली तक ले आये. लेकिन ईसा ने अपने लिए खुदे गड्ढे को नम्रतापूर्वक पाटने का काम किया, राहों पर बिछे कांटों का ताज अपने सर पर लिया,जलील हुआ पर श्राप नहीं दिया,बर्छे और तलवार के बदले प्यार दिया, दाढ़ी नोची गई और मुंह पर थूका गया. लेकिन हाय और उफ् के बदले माफी दी.
आ ज हम जिस दौर में हैं हलात् उससे भी बदतर है.खून के बदले खून,आंख के बदले आंख.हर बातों में हमारी भावनायें, आस्थायें आहत होती हैं, सहिष्णुता और भाईचारा शायद चिरनिंद्रा में है. लुचपन,ढोंग, आडंबर, डींग, नफरमानी,बलात्कार,चोरी, छल कपट और जाने क्या क्या यहां घर कर गई हैं.
क्योंकि लिखा भी है अंतिम दिनों में ऐसा होगा
2 तीमुथियुस 3:2-5
क्योंकि मनुष्य अपस्वार्थी, लोभी, डींगमार, अभिमानी, निन्दक, माता-पिता की आज्ञा टालने वाले, कृतघ्न, अपवित्र।
दयारिहत, क्षमारिहत, दोष लगाने वाले, असंयमी, कठोर, भले के बैरी।


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