ईसाईयों का परमेश्वर असर्वज्ञ है, वह परीक्षा लेता है. अय्यूब की उसने परीक्षा ली!!

बुरे वक्त में इंसान ईश्वर की बुराई करने लगता है. अय्युब नेक और खरा इंसान था.वह बुरे वक्त में भी ईश्वर की स्तुति नहीं छोड़ा.

        शैतान बुराई का पिता है. अय्युब शैतान के द्वारा परखा गया. परखने की इजाज़त ईश्वर से मिली.इसमें ईश्वर असर्वज्ञ कैसे हुआ बाईबल ईश्वर को सर्वज्ञ बताती है. चंद आयतों को लेकर नतीजे तक नहीं पहुँचा जा सकता. अर्थ का अनर्थ होगा.

अय्युब अध्याय 2 में यही तथ्य समझाया गया है कि सच्चाई खराई और नेकी की जिंदगी बसर करनेवाला विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धर्म नहीं खोता और अंत में पुरस्कृत होता है.

विधर्मी दयापंथियों के आक्षेप इस प्रकार होते हैं👇Published from Blogger Prime Android App

 💥शैतान उसके भक्तों के सामने उसके भक्तों को दुख देता है. इसलिए ईश्वर असामर्थ्य वान कैसे हुआ??

अय्युब पूरे अध्याय पढ़ें तो स्पष्ट है  ईश्वर भक्त अय्युब जीत गया.शैतान हारा है.

अय्युब के कथनों पर गौर करें.

परमेश्वर बुद्धिमान और अति सामर्थी है: उसके विरोध में हठ करके कौन कभी प्रबल हुआ है?

अय्यूब 9:4

 “मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है, उसके दिन थोड़े और दुःख भरे है। वह फूल के समान खिलता, फिर तोड़ा जाता है; वह छाया की रीति पर ढल जाता, और कहीं ठहरता नहीं। मनुष्य के दिन नियुक्त किए गए हैं, और उसके महीनों की गिनती तेरे पास लिखी है, और तूने उसके लिये ऐसा सीमा बाँधा है जिसे वह पार नहीं कर सकता,

अय्यूब 14:1-2, 5

💥शैतान दण्डित है.हिब्रू बाइबिल में प्रायः शैतान का अर्थ है प्रत्यक्ष उद्देश्य से पहले, जिसका अर्थ है "एक विरोधी" #ईशविरोधी।

बाईबल के अनुसार शैतान नारकीय अभियोग के वकील के रूप में कार्य करता है, जो परमेश्वर के स्वर्गीय न्यायालय के सामने पापियों के खिलाफ आरोप ला रहा है। उदाहरण के लिए, भजन 109: 6 में लेखक शैतान से पूछता है कि दुश्मन को मुकदमा लाने के लिए। इसके अलावा जकर्याह 3: 1-2 में, शैतान एक दूत के दाहिने हाथ पर खड़ा होता है जो महायाजक के खिलाफ आरोप लगाता है। अय्यूब के शुरुआती अध्याय में शैतान की भी एक ऐसी भूमिका है, जहां वह अय्यूब के खिलाफ आरोप लाने के लिए परमेश्वर के पुत्रों के साथ स्वर्गीय अदालत में प्रकट होता है.

हिब्रू बाइबिल के पहले के लेखन में, शैतान एक व्यक्तित्व जो असाधारण शक्तियों से लैश धर्म के खिलाफ कार्य करनेवाले के रूप में मौजूद है.

शैतान अधर्मियों का बुराई, राक्षसों का शासक, दुश्मन, इस दुनिया का शासक, और बेलेज़बुल (बेलेज़बब, जिसका अर्थ है " मक्खियों के भगवान, "बेल्जबिल नाम का एक श्लोक है, जिसका अर्थ है #राजकुमार _बाल

शैतान (अंग्रेज़ी :Satan सेटन या Devil डेविल), इब्रानी :שָׂטָן शातान, अरबी :شيطان शैतान । शाब्दिक अर्थ : दुश्मन, विरोधी या अभियोगी) बाईबल के अनुसार सबसे दुष्ट अस्तित्वी का नाम है, जो दुनिया की सारी बुराई का प्रतीक है. हिन्दू संप्रदाय के मतानुसार ये मायावी अस्तित्व हैं. जो धर्म के लिए बाधक और रोड़े हैं. धर्म के कार्यों में ये व्यवधान लाते हैं.ईसाईयत इस्लाम और यहूदी मतों के अनुसार शैतान पहले ईश्वर का एक फ़रिश्ता था, जिसने ईश्वर से विद्रोह किया और इसके बदले ईश्वर ने उसे स्वर्ग से निकाल दिया.शैतान पृथ्वी पर मानवों को पाप के लिये उकसाता है। कई उसे नर्क का राजा भी मानते हैं. शैतान शब्द अन्य दुष्ट भूत-प्रेतों और दुष्ट देवों के लिये भी प्रयुक्त होता है.Published from Blogger Prime Android App

💥ईश्वर भक्तों का शैतान कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता.अय्युब के पूरे अध्याय से यह स्पष्ट है. शैतान भक्तों से जीत नहीं सकता.

💥ईश्वर की संगति करनेवाले शैतान से भयभीत नहीं होते. बल्कि शैतान भी पास फटकने से घबराता है.

💥आक्षेप:-ईसाइयों का परमेश्वर सर्वज्ञ नहीं है.सर्वज्ञ होता तो परीक्षा नहीं लेता..

💥परमेश्वर सर्वज्ञ है..“क्योंकि परमेश्वर की आँखें मनुष्य की चाल चलन पर लगी रहती हैं, और वह उसकी सारी चाल को देखता रहता है। ऐसा अंधियारा या घोर अंधकार कहीं नहीं है जिसमें अनर्थ करनेवाले छिप सके।

अय्यूब 34:21-22

      परीक्षक परीक्षा इसलिए नहीं लेता कि वह कुछ भी नहीं जानता. परीक्षा परीक्षार्थी की योग्यता सिद्ध करने के लिए होता है कि उसके पास योग्यता का प्रमाण हो.

Comments

Popular posts from this blog

परमेश्वर झूठ बोलता है. शैतान को बनाने वाला भी वही है.

दयानन्द और गुप्त संस्था Freemason

प्रायश्चित्त करनेवालों ईश्वरीय अनुग्रह होती है.