जाति जन्माधारित वर्ण कर्माधारित?
कर्म तो पल पल में वैसे ही बदलते रहते हैं
जैसे मन की चिरन्तन चिन्तन परम्परा बदलती रहती है.
किस मीटर से हमारे बन्धु नापेंगे कि ...
अमुक व्यक्ति इतने से इतने समय तक ब्राह्मण रहा...
इतने से इतने समय तक क्षत्रिय...
इतने से इतने समय तक वैश्य या शूद्र!!??
हल चलाने लगा तो कृषक,,,
भोजन पकाने लगा तो पाचक..,
कपड़े धोने लगा तो रजक...
दाढी बाल बनाने लगा तो नापित,,,
पढाने लगा तो शिक्षक,,
जूता की पालिश करने लगा तो,,,,,,??कूड़े उठाने वाला हुआ तो??
एक दिन में विचारेंं की 10 जातियां बन और बिगड़ जायेंगी🤔🤔🤔
आप कहते हैं कि ये तो जाति नहीं हैं,,,हम कहते हैं कि कर्म से जाति मानने वालों को इससे क्या फर्क पड़ता है ??जैसा कर्म वैसा वर्ण तो वे मानते ही हैं,,,

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