जाति जन्माधारित वर्ण कर्माधारित?


कर्म तो पल पल में वैसे ही बदलते रहते हैं
जैसे मन की चिरन्तन चिन्तन परम्परा बदलती रहती है.

किस मीटर से हमारे बन्धु नापेंगे कि ...

           अमुक व्यक्ति इतने से इतने समय तक ब्राह्मण रहा...

इतने से इतने समय तक क्षत्रिय... 


इतने से इतने समय तक वैश्य या शूद्र!!??

हल चलाने लगा तो कृषक,,, 

भोजन पकाने लगा तो पाचक.., 

कपड़े धोने लगा तो रजक...

 दाढी बाल बनाने लगा तो नापित,,,

पढाने लगा तो शिक्षक,, 

जूता की पालिश करने लगा तो,,,,,,??कूड़े उठाने वाला हुआ तो??

एक दिन में विचारेंं की 10 जातियां बन और बिगड़ जायेंगी🤔🤔🤔
आप कहते हैं कि ये तो जाति नहीं हैं,,,हम कहते हैं कि कर्म से जाति मानने वालों को इससे क्या फर्क पड़ता है ??जैसा कर्म वैसा वर्ण तो वे मानते ही हैं,,,

   कर्म से जाति मानने से तो लाख गुना बेहतर है कि जाति को मानो ही मत तो आपका निर्वाह हो जायेगा झगड़ा भी कोई नहीं,,

परन्तु अर्ध कुक्कुटी न्याय उचित नहीं,,,,

मनुस्मृति में लिखा है कि बाह्मण बालक का यज्ञोपवीत संस्कार गर्भ से आठवे वर्ष में करना चाहिए,(((गर्भाष्टमेब्दे कुर्वीत,ब्राह्मणस्योपनायनम्,,))) ,,क्षत्रिय बालक का संस्कार गर्भ से ग्यारहवें वर्ष में करना चाहिये (((गर्भादेकादशे राज्ञो))) ,,,,वैश्य बालक का संस्कार गर्भ से बारहबें वर्ष में करना चाहिये(((गर्भात्तु द्वादशे विशः)))मनुस्मृति 2,36 ,,,आप मनु स्मृति प्रोक्त इस व्यवस्था को जन्म से स्वीकार करेंगे या कर्म से ,,यदि कर्म से तो सिद्ध करें कैसे,,,???https://https://youtu.be/zi_eOZuVMQc

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