ईसाईयों के परमेश्वर के बेटे बेटियाँ हैं तो सास ससुर और साला सालियाँ होंगी??
👹ईसाइयों से ये पूछना चाहिए कि ईश्वर के बेटे कौन हैं?
👿ईसाइयों के ईश्वर की पत्नी, सास,श्वसुर, साला और संबंधी कौन हैं.?
उत्पत्ति6:1-4 के संदर्भ में दुराग्रही तत्वों द्वारा अक्सर यही सवाल किये जाते हैं.
बाईबल हरेक इंसान को ईश्वर की संतान बताती है.
और तुम्हारा पिता हूँगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियाँ होंगे; सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर का वचन है।” (2 शमू. 7:14, यशा. 43:6, होशे 1:10)
2 कुरिन्थियों 6:18 देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएँ, और हम हैं भी; इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 यूहन्ना 3:1
बाईबल सारी मानव जाति को ईश्वर की संतान कहती है. इसका मतलब ये नहीं कि उसकी कोई बीवी है.या सैकड़ों वीवियां रही होंगी...
हाँ संतानें बुरी या अच्छी हो सकती हैं. अच्छी संतानें पिता की कद्र जानती है और बुरी पिता के विरुद्ध चलती हैं.
उत्पति 6:1-4 परमेश्वर के पुत्र और मनुष्यों की पुत्रियों का उल्लेख करता है। परमेश्वर के पुत्र कौन थे? और क्यों उनकी सन्तानें जो मनुष्यों की पुत्रियों से उत्पन्न हुई. #नपीली शब्द सम्भवत: संकेत शूर,अलौकिक शक्तियों से युक्त मानव हैं.
बाईबल में परमेश्वर के पुत्रों की पहचान के विषय मे तीन मुख्य विचार है 1) वे गिराए गए स्वर्गदूत थे, 2) वे शक्तिशाली मानव शासक थे, 3) वे शेत के धर्मी वंशज थे जिन्होने कैन के दुष्ट वंशजों के साथ अंतर्जातीय विवाह किया था। पहले सिद्वान्त को यह तथ्य बल देता है कि पुराने नियम का "परमेश्वर के पुत्र" कथन में सबसे अधिक फरीश्तों के लिए उपयोग हुआ है (अय्यूब 1:6; 2:1; 38:7)।
अब्राहम को दर्शन देने वाले फरीश्ते, सदोम और अमोरा नगर के विनाश से पहले दो फरीश्तों का दर्शन इसकी तस्दीक़ करता है.
इन्हीं फरीश्तों और साधारण मानव स्त्री से विवाह से उत्पन्न उनकी संतानें“दानव" या "शूरवीर या पुराने समय के नायक”हुए. जिन्हें दुनिया आज भी याद करती है. भारतीय दर्शन शास्त्रों में ऐसी विवाह #गंधर्व विवाह, राक्षसी विवाह,#नियोग,#अग्निहोत्र(दैविक शक्तियों के फल),यज्ञ हवनादि से देवताओं को प्रसन्न कर संतान प्राप्ति होने का जिक्र है.***तब परमेश्वर के पुत्रों ने मनुष्य की पुत्रियों को देखा, कि वे सुन्दर हैं; और उन्होंने जिस-जिस को चाहा उनसे ब्याह कर लिया। उन दिनों में पृथ्वी पर दानव रहते थे; और इसके पश्चात् जब परमेश्वर के पुत्र मनुष्य की पुत्रियों के पास गए तब उनके द्वारा जो सन्तान उत्पन्न हुए, वे पुत्र शूरवीर होते थे, जिनकी कीर्ति प्राचीनकाल से प्रचलित है।
उत्पत्ति 6:2, 4

बाईबल यहाँ भारत सहित पूरी दुनिया के उन प्राचीन कीर्तियों,शूरवीरों, राक्षसों की ओर ईशारे कर रही है. हर युग के चक्रवर्ती सम्राट और रामायण, महाभारत काल के राक्षस आज भी याद किये जाते हैं.
केवल गिराए गए स्वर्गदूतों का मानव स्त्रियों के साथ अश्लील, भ्रष्ट, अनैतिक विवाह के बाद धरती पर अधर्म और भी बढ़े.इसका परिणाम ही जलप्रलय था.
यहोवा ने देखा कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है वह निरन्तर बुरा ही होता है। (भज. 53:2) और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ। तब यहोवा ने कहा, “मैं मनुष्य को जिसकी मैंने सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूँगा;* क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगनेवाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, सब को मिटा दूँगा, क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूँ।”
उत्पत्ति 6:5-7
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