आप कमजोर नहीं हो...
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बुराई का देवता शक्तिशाली नहीं है, आप दुर्बल हो. जरा गौर करें एक दफा अपने अंदर झांक लीजिए... अंधेरा कितना घना है तब आप टटोल पायेंगे कि आपकी आत्मा किसी बियाबान के खोह में पड़े पंछी नाई हूक रही है.स्मरण रखिए बुराई का देवता(शैतान)वाकई इतना शक्तिशाली नहीं है जितना आप समझते आ रहे हैं..... ये जान लीजिए कि सांप का फन कुचला जा चुका है बस पूंछ छटपटा रही है.अगर आप पाप में गिरते हैं तो इसमें शैतान का दोष नहीं है. आप गिरे हो अपनी दुर्बलताओं के कारण.जैसे सूखे जड़ वाला वृक्ष आंधियों में गिर जाता है. आंधी न भी आता तो उसे गिरना ही था. आंधी तो बहाना हुआ.आंधी न भी आये तो ये दरख्त अपनी दुर्बलताओं के कारण गिर जायेंगे. आज देखने की बारी आपकी है कि आपकी जड़ें कहाँ तक मजबूत हैं. आत्मा के फल दया,संयम, कृपा,.. प्रेम,क्षमा..... सूखे जड़ वाली दरख्तों में कहाँ से आयेंगे. अपनी दुर्बलताओं में घुटनों पर आकर संबल के लिए दुआ कीजिए.
आपको आपकी ही दुर्बलता गिराती है.वस्तुतः शैतान तो पंगु है. हां एक दिन उसे बल दिया जायेगा. अभी आप बुराई के देवता के प्रभाव में नहीं हैं.कारण भी जान लीजिए. जो जहाँ नहीं है उसे वहां खोजने से धीरे धीरे विश्वास जाता है. आप याचना भी करते हैं तो वहां दर्द नहीं है. ब्यर्थ में सार्थक को खोजने से और न पाने से विश्वास कमजोर होता है और विश्वास टूटा तो आपकी आशा निराशा में तब्दील होने में देर नहीं. बुराई का देवता यही तो चाहता है आपको निराशा की खाई में धंसाना.
"यदि आपका विश्वास राई के दाने के बराबर भी अगर हो तो कहो पर्वत समुद्र में जा पड़ तो ऐसा ही होगा." पर आपमें विश्वास कहाँ है?
हमारे ईमान लड़खड़ा जाते हैं कदम उठाने से पहले ही हम भविष्य की काल्पनिक असफलताओं का अनुमान कर डरने और कांपने लगते हैं.....दुआ करें कि आपके अंदर का डर....,, जाये।। हमें डरने की जरूरत नहीं क्योंकि हम विजयी हैं...लिखा हैप्रकाशित वाक्य 1:17-18
[जब मैं ने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा और उस ने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रख कर यह कहा, कि मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम और जीवता हूं।
मैं मर गया था, और अब देख; मैं युगानुयुग जीवता हूं; और मृत्यु और अधोलोक की कुंजियां मेरे ही पास हैं।
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