अगले जन्म में●●●

अगले_जन्म_में◆◆◆

एक बार क्या हुआ कि एक चमार काला काशी बनारस पहुँचा था.वह सनातन संस्कृति की बाहरी रीति रिवाज को देखते हुए काशी के एक ब्राह्मण से प्रार्थना की कि वह ब्राह्मण बनना चाहता है.इसके लिए उसे क्या करना होगा??क्योंकि वह ब्राह्मण की उच्चता को समझ चुका था.उसकी सनातन धर्म में बड़ी श्रद्धा थी.वह सनातन धर्म का सच्चा सिपाही भी था.पर वो ब्राह्मण बनना चाहता था.

ब्राह्मण देवता ने कहा..तुम्हें सौ यज्ञ कराने होंगे, ब्रह्म भोज और ब्राह्मणों को गौ स्वर्ण दान करने होंगे..घर बार सब दान करने होंगे.

इतना सुनकर चमार बोला...फिर मैं ब्राह्मण तो बन जाऊँगा ना!??

ब्राह्मण ने कहा इतना सब कुछ करने के बाद तू ब्राह्मण तो बन जायेगा लेकिन इस जन्म में नहीं अगले जन्म में.एक काम करो अब जाओ और गंगा में यह इच्छा धर कर कि अगले जन्म में मेरा ब्राह्मण कुल में जन्म हो कूदकर जान दे दो......

अगले जन्म में तुम्हारा जन्म ब्राह्मण कुल में अवश्य होगा.

सवाल नं. १:जाति और कुल में क्या भेद है?

२:चमार ब्राह्मण हो सकता है?

३:कर्म से यदि चमार ब्राह्मण हो सकता तो जन्म से ब्राह्मण परिवार से रोटी बेटी का संबंध रख सकता है??

मनु कहते हैं- जन्मना जायते शूद्र: कर्मणा द्विज उच्यते। अर्थात जन्म से सभी शूद्र होते हैं और कर्म से ही वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र बनते हैं।

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अब इ बताइये कि जन्म से जो शुद्र है उसे जन्म से ब्राहमण होनेवाला कंसेप्ट् कहां से आया। साथ ही ये भी बताइये कि शुद्र का बेटा ब्राहमण नहीं हो सकता है और ब्राहमण का बेटा कभी शुद्र नहीं हो सकता है यह सिंद्धांत किसने गढा???

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