ईसा मसीह सृष्टि के पूर्व भी थे.

आदि में वचन था, वचन परमेश्वर के साथ था. सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ....... भारतीय दर्शन इसी तथ्य को ब्रह्मसूत्र में स्वीकारता है."शब्दात् प्रभवति जगत्, शब्दपूर्विका सृष्टि:"(ब्रह्मसूत्र१.३.२८)अर्थात सृष्टि शब्द से उत्पन्न हुई. सृष्टि के पूर्व केवल शब्द था।।

     बाईबल में सृष्टि रचना में तीन शक्तियों का जिक्र है

1:परमात्मा(god)

   2:वचन(शब्द, फ्रिक्वेंसी)

3:पवित्र आत्मा(होली स्पिरिट)

वचन(frequency)परमात्मा की प्रेरणा से झंकृत होकर सृष्टि का कारक बना.वचन से ही सृष्टि हुई.

     सृष्टि के पूर्व वह अंधियारा था,जिससे ज्यादा अंधियारा हो ही नहीं सकता. सृष्टि से पहले वह सन्नाटा था, जिससे बड़े सन्नाटे की कल्पना भी नहीं की जा सकती. इसी सन्नाटे और अंधियारे के बीच वचन प्रेरित हुआ और सृष्टि का धमाका हुआ. अंधियारा चौंधियाया और सन्नाटा भंग हुई.अंधियारे में frequency,वचन शब्द रश्मियां उद्दीप्त हुईं और तमाम सृष्टियाँ हुईं. इसी महान घटना को विज्ञान "बिग बैंग"कहती है.

    आज वैज्ञानिक शोधों में यही साफ हो रहा है. शब्द के छोटे रूप फ्रिक्वेंसी और सूक्ष्म रश्मियां होतीं हैं. वैदिक दर्शन भी फ्रिक्वेंसी "ऊ"को रश्मि और सृष्टि का कारक मानती है.

   सृष्टि रचना के बाद परमात्मा की अनुपम कृतियाँ(मानव) नेगेटिव एनर्जी के प्रभाव में आकर विकृत हुई और रोशनी को छोड़ अंधियारे(बुराई)की ओर झुकने लगीं.

    वचन अंधियारे को मिटाने देहधारी हुआ.अंधियारे में ज्योति की नाई चमका ताकि परोक्ष तथ्य सत्य उजागर हो. लेकिन अंधेरा पसंद मानवों को रोशनी पसंद नहीं आया.यूहन्ना 1:3-5

[3]सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।

[4]उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी।

[5]और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।

सृष्टि जैसे अंधियारे में समाया था एक दिन वैसे ही अंधियारे में फिर से समा जायेगा. प्रलय होगा, कयामत के दिन.आयेंगे....

  इसी को विज्ञान "बिग क्रंच"कहता है. सृष्टि पहले शून्य बिंदु पर सिमटी थी.ब्रह्माण्ड धीरे धीरे सिकुड़ता जायेगा, डार्क एनर्जी कमजोर होगी, ग्रेविटी पुनः हावी होगी और सभी गलैक्सीज एकदूसरे की ओर खिंचकर एकदूसरे से टकराने लगेगी और इसका फैलाव कम होता जायेगा. ब्रह्मांड का तापमान बढ़ने लगेगा.इस कंडीशन में एटम्स टूट कर बिखर जायेंगे. जगह जगह ब्लैकहोल्स बनकर सारे ब्रह्माण्ड को निगलते जायेंगे फिर सब मिलकर सुपर ब्लैकहोल बन जायेंगे. यूनिवर्स का सारा मैटर क्रश्ड और कंप्रेस्ड होकर एक प्वाइंट ऑफ सिंगुलैरिटी पर इकट्ठा हो जायेगा. जिसका मॉस पूरे यूनिवर्स के बराबर होगा और बचेगा तो वही अंधियारा, घोर सन्नाटा और शून्य बिंदु. जो अपने अंदर पूरे ब्रह्मांड को समेटे होगा किसी अगले बिगबैंग के इंतजार में..........Published from Blogger Prime Android App

  बाईबल में नई सृष्टि का भी जिक्र है.यशायाह 65:17

[17]क्योंकि देखो, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी उत्पन्न करने पर हूं, और पहिली बातें स्मरण न रहेंगी और सोच विचार में भी न आएंगी।

वचन ही ईसा है. ईसा सृष्टि के पूर्व भी था और सृष्टि के बाद भी परमात्मा से प्रेरित है. जिसने ईश्वरीय सामर्थ्य से प्रकृति को भी वश में करना जाना है.

   अब ऐसा कहने में कोई हर्ज नहीं"आदि में ईसा था.ईसा परमेश्वर ने साथ था.सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ.

Alok kujur26/11/2018

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