वैदिक धर्म क्या कहता है??

वेदों में कहा गया है कि

नास्तिकों से रहो।

शूद्रों से दूर रहो।

मलेच्छों से दूर रहो।

विधर्मियों से दूर रहो।

दयापंथियों के स्वामी ने भी कहा है चण्डाल घिन्न बसाते हैं

  चमारों के साथ मत रहो.

 व्यक्ति यदि चमड़े का कार्य करने के पश्चात नहा धोकर जनैऊ टीका इत्यादि लगाकर दयाजी के पास आते तो क्या वे उन्हें गले लगा लेते।

ऐसा कहीं उनका कथन है???


इस्लाम इशाईयत बौद्ध सिख आदि के प्रवर्तकों ने कहा नास्तिकों को समझाओ,

शूद्रों को गले लगाओ,

गरीबों की मदद करो,

अशिक्षितों को शिक्षित करो।

विधर्मियों को धर्म के मार्ग पर लाने का यत्न करो।


तो आज के आर्यनमाजी दयापंथी वेद का उल्लंघन कर किस मुँह से दलितों पिछड़ों आदिवासियों के बीच जाना चाहते हैं???

इशाईयत इस्लाम बौद्ध सबका दुनिया में बिस्तार हुआ और दैनंदिन बिस्तार होता जा रहा है।

लेकिन वैदिक विलुप्त हो गए।इसके लिए क्यों रोना रोते हैं??दूर रहो दूर रहो दूर रहो....का वैदिक मंत्र ही तो जिम्मेवार हैं इनके संपूर्ण समाज से कट जाने का।

समस्त छुआछूत जातपांत ऊँचनीच का फर्मूला इसी वैदिक सूत्र में है।

आगे व्यास स्मृति में इन्हीं वैदिक सूत्रों को बिस्तार दिया गया है।और ब्राह्मणों को समस्त एससी एसटी ओबीसी से घृणा करने अछूत मानने का संदेश दिया गया है।Published from Blogger Prime Android App

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