बाईबल में औरतों का महत्व..

#बाइबिल_में_औरत_का_दर्ज़ा...............................

अगर आदम का अकेला रहना खुदा को भाया होता

तो खुदा ने कभी हव्वा को ना बनाया होता

अगर रखना होता हव्वा को कमतर आदम से

तो उसने हव्वा को आदम की पसली से नहीं पाँव के अँगूठे से बनाया होता

अगर देना ना होता इज़्ज़्त का दर्ज़ा औरत को

तो सारा को बुढ़ापे में माँ ना बनाया होता

अगर भरना ना होता रूह-ए-पाक से औरत को

तो खुदा का बेटा मरियम के हरम में ना समाया होता

अगर होता ना पाक रिश्तों का शाफी

तो पतरस की सास का बुखार ना भगाया होता

अगर माफी होती जागीर सिर्फ मर्दो की

तो गुनाहगार औरत को पत्थराव से ना बचाया होता

अगर देनी होती दोज़ख़ की आग औरत को

तो सामरी औरत को ज़िंदगी का पानी ना पिलाया होता

अगर पैदा होकर बेटी बोझ होती माँ बाप पर

तो मुर्दा लड़की को यीशु मसीह ने ना जिलाया होता

अगर होती पाबंदी आशा पर तिलावते कलाम की

तो जी उठने का पहला पैगाम औरतों ने ना पहुंचाया होता.!

*सभी महिलाओं को समर्पित*Published from Blogger Prime Android App

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