पुनर्जन्म का सच??

#पुनर्जन्म_मिथ्या_या_सत्य???

मेरा नाम रजनीश है। अब इसका मतलब यह हुआ कि मेरे भीतर इस वक्त जो आत्मा है, वह पहले किसी राकेश, सुरेश सा प्रकाश के शरीर में रही होगी। या हो सकता है कि किसी गधे, शेर अथवा हाथी के शरीर में। यानी की यह आत्मा इस समय मेरे शरीर में अस्थायी तौर पर निवास कर रही है। यहाँ पर मुख्य सवाल यह कि मैं क्या हूँ? क्या मैं आत्मा हूँ? या फिर मैं शरीर हूँ? जाहिर सी बात है मेरी पहचान मेरे शरीर से ही है, इसलिए मैं का मतलब मेरा शरीर भर है। अब मान लीजिए मेरा देहान्त हो जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि मेरा शरीर मर गया। क्योंकि आत्मा कभी मरती नहीं, वह अजर अमर है। मान लेते हैं कि मेरे मर जाने के बाद आत्मा जिस शरीर में प्रवेश पाती है, उस शरीर के माँ-बाप उसका नाम राजेश रखते हैं। तो अब यह बताइए कि क्या राजेश के रूप में वह रजनीश का पुनर्जन्म होगा?Published from Blogger Prime Android App


यदि ऐसा है तब तो फिर प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी का पुनर्जन्म होता है। लेकिन अगर ऐसा होता, तब तो हर व्यक्ति अपने पिछले जन्म के बारे में दावा करता घूमता। जबकि ऐसा नहीं होता है। ऐसा दावा कभी साल दो साल में कहीं एक व्यक्ति कर देता है। अब आप ही सोचिए कि राजेश नामक व्यक्ति पुनर्जन्म का जो दावा कर रहा है, तो यह कैसे सम्भव है? वह तो पहले राजेश था ही नहीं, वह तो पिछले जन्म में रजनीश था। फिर रजनीश की बातें बताकर राजेश साबित क्या करना चाहता है?Published from Blogger Prime Android App

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