अहंकार

#अहंकार●●●

 अनगिनत पापों को जन्म देने वाला अहंकार आत्म प्रशंसा के बीज से उत्पन्न होता है.खुद को सर्वोच्च, श्रेष्ठ मान लेने का भाव यहीं से पैदा होता है. ऐसी स्थिति में ब्यक्ति निंदा, विरोध, दुराग्रह में बड़ा रस लेता है. घृणा, द्वेष, क्रोध, प्रतिशोध, गलौच,अशांति आदि मनोविकारों से वह पीड़ित होता है.

      इन मानस रोगों का नाश करनेवाली औषधियाँ दया,क्षमा, करुणा, प्रेम,धैर्य, नम्रता, आनंद,भलाई, शांति आदि हैं. इनसे अहंकारी वंचित होता है.

अहंकार हमारी पर्सनैलिटी को उसी प्रकार धुँधला किये रहता है जैसे धधकते अंगारों पर जमी राख की परत होती है. अहंकार तुच्छ प्रकार की मनुष्यता है.

अहंकार सदैव दूसरों की कमजोरी एवं बुराई को ही देखता है. यह हमेशा दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करता है. अहंकारी हमेशा दूसरों को नीचे गिराकर आगे बढ़ने की सोचता है..

जब कभी वह ऊंचाई पर पहुँचता है उसका दंभ भी शिखर पर होता है. ऐसे में वह भूल जाता है कि एक दिन उसका पतन भी होगा और वह नीचे गिरेगा... तब उसका साथ देने वाला कोई नहीं होगा.Published from Blogger Prime Android App

Comments

Popular posts from this blog

परमेश्वर झूठ बोलता है. शैतान को बनाने वाला भी वही है.

दयानन्द और गुप्त संस्था Freemason

प्रायश्चित्त करनेवालों ईश्वरीय अनुग्रह होती है.