दयापंथियों को विवेकानंद चुभते हैं.

 इतने बड़े धर्म धुरंधर दुनिया भर में धर्म ध्वजा फहराने वाले विवेकानंद के खिलाफ #दयापंथी इसलिए हैं क्योंकि ये शूद्र हैं।उन्हें जीते जी मनुवादियों ने काफी परेशान किया था।

      शूद्र भी कर्म से ब्राह्मण बन सकता है और ब्राह्मण भी शूद्र हो सकता है. यह कह देना आसान है. यह स्टंट ही है.

                    दलितों शूद्रों, आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अत्याचार और ऊँच नीच पर ये कथित #आर्य सामने आकर दलितों का पक्ष क्यों नहीं लेते.

उन मंदिरों से जहाँ प्रवेश द्वार पर ही शूद्रों का प्रवेश वर्जित लिखे नोटिसों को क्यों नहीं हटवाते.

      जिन्हें दलितों की लंबी मूँछें चूभती है उनका इलाज क्यों नहीं करते.!?

दलित के घोड़ी पर बारात निकलने से जिन्हें पीड़ा होती है वहाँ दर्द निवारक औषधि क्यों नहीं पहुँचाते??

      आये दिन अखबारों के हेडलाइनों पर दलितों आदिवासियों, पिछड़ों पर भेदभाव और अत्याचार की खबरें क्यों आते हैं.

                दरअसल दयापंथी कुनबा वही पुराना कुनबा है जहाँ ऊँचनीच और भेदवाव बदस्तूर है.Published from Blogger Prime Android App

ये वही दयापंथी हैं जो दयानन्द से भी ऊँचा दर्जा प्राप्त अग्निवेश का #लिंचिंग करते हैं.

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