दानिएल नबी का अजीबोगरीब स्वप्न..


दानियेल की अजीबोगरीब स्वप्न मूर्ति को लेकर की गई भविष्यवाणियां और सिकंदर महान....

सामान्य युग पूर्व 336 में जब सिकंदर III सिर्फ 20 साल का था तब वह मकिदुनिया की राजगद्दी पर बैठा। वह पूरी दुनिया पर फतह पाना चाहता था और अपनी इस ख्वाहिश को पूरा करने के लिए वह अपनी फौजों को लेकर दुनिया जीतने निकल पड़ा। युद्धों में बेमिसाल महारथ दिखाने की वज़ह से उसे सिकंदर महान कहा जाने लगा। वह एक के बाद एक जंग जीतकर फारस के साम्राज्य में घुसता चला गया। जब उसने सा.यु.पू. 331 में दारा III को गौगमेला में हराया, तब से फारस का साम्राज्य खत्म होना शुरू हो गया और सिकंदर ने यूनान (ग्रीस) को नई विश्‍वशक्‍ति बना दिया।

 गौगमेला की जंग जीतने के बाद सिकंदर ने फारस की चारों राजधानियों को यानी बाबुल, शूशन, (सूसा) पर्सेपोलिस, और अहमता (इकबाताना) को जीत लिया। फारस के बाकी साम्राज्य को अपने कब्ज़े में लेने के बाद वह हिन्दुस्तान की तरफ बढ़ चला। जहाँ-जहाँ वह जीतता गया वहाँ-वहाँ यूनानी उपनिवेश बसते गए। इस तरह यूनान (ग्रीस) की भाषा और संस्कृति दुनिया-जहान में फैल गयी। दरअसल यूनान से पहले कोई भी साम्राज्य इतना नहीं फैला था। ठीक जैसा दानिय्येल ने बताया था इस पीतल के राज्य में ‘सारी पृथ्वी आ गयी।’ इसका एक नतीजा यह हुआ कि बोलचाल की यूनानी भाषा जिसे किनी कहा जाता था, अंतर्राष्ट्रीय भाषा बन गई। इस भाषा में किसी भी बात को सही-सही और बेहतरीन तरीके से कहने की खूबी थी। इसीलिए यह बाइबल का मसीही यूनानी शास्त्र (मत्ती से लेकर प्रकाशितवाक्य) लिखने के लिए सबसे मुनासिब भाषा साबित हुई और साथ ही दुनिया भर में परमेश्‍वर के राज्य की खुशखबरी फैलाने के लिए भी।


 सिकंदर महान के मरने पर यूनान के साम्राज्य का क्या हाल हुआ?

सिकंदर महान सिर्फ आठ साल तक दुनिया का सम्राट रहा। क्योंकि जब वह सिर्फ 32 साल का ही था, तब एक दावत के बाद वह बीमार पड़ गया और कुछ समय बाद, जून 13 सा.यु.पू. 323 को मर गया। और थोड़े ही समय में उसका इतना बड़ा साम्राज्य चार हिस्सों में बँट गया। उसके चार सेनापति एक-एक हिस्सा लेकर उस पर राज करने लगे। इस तरह एक बड़े साम्राज्य में से चार छोटे-छोटे राज्य निकले। बाद में इन चार राज्यों को रोमी साम्राज्य धीरे-धीरे निगलने लगा। आखिर में सिर्फ सेनापति टॉल्मी का राज्य बचा, जिसका राजवंश, मिस्र (इजिप्ट) पर राज करता था। फिर रोम ने इसे भी नाश कर दिया जिससे यह पीतल का सा साम्राज्य सा.यु. 30 में पूरी तरह खत्म हो गया।


चूर-चूर करनेवाला और कुचलनेवाला एक राज्य


 दानिय्येल ‘चौथे राज्य’ के बारे में क्या बताता है?

 दानिय्येल सपने का मतलब बताना जारी रखता है: “और [बाबुल, मादी-फारस और यूनान के बाद] चौथा राज्य लोहे के तुल्य मज़बूत होगा; लोहे से तो सब वस्तुएं चूर चूर हो जाती और पिस जाती है; इसलिये जिस भांति लोहे से वे सब कुचली जाती हैं, उसी भांति, उस चौथे राज्य से सब कुछ चूर चूर होकर पिस जाएगा।” (दानिय्येल 2:40) ठीक जैसे लोहा सब धातुओं से ज़्यादा मज़बूत होता है वैसे ही यह नई विश्‍वशक्‍ति मूरत के सोने, चाँदी और पीतल समान साम्राज्यों से ज़्यादा ताकतवर होती। और रोम साम्राज्य ऐसी ही ताकत था।


 किस तरह रोम का साम्राज्य लोहे के समान था?

लोहे के समान रोम के साम्राज्य ने यूनानी साम्राज्य को चूर चूर कर डाला और मादी-फारस और बाबुल जैसी विश्‍वशक्‍तियों के बचे-खुचे भागों को निगल लिया। इसने परमेश्‍वर के राज्य की भी कोई इज़्ज़त नहीं की और इस राज्य का प्रचार करनेवाले यीशु मसीह को सा.यु. 33 में यातना स्तंभ पर ठोककर मार डाला। इतना ही नहीं, सच्ची मसीहियत को कुचलने के लिए रोम ने यीशु के चेलों पर ज़ुल्म ढाए। यहाँ तक कि रोमियों ने सा.यु. 70 में यरूशलेम और उसके मंदिर को भी खाक में मिला दिया।


मूरत की टाँगें रोमी साम्राज्य के अलावा और क्या हैं?

नबूकदनेस्सर के सपने में मूरत की लोहे की टाँगें न सिर्फ रोमी साम्राज्य था बल्कि ये टाँगें इस साम्राज्य से निकलनेवाले दूसरे साम्राज्य भी थीं। इसके बारे में जानने के लिए आइए प्रकाशितवाक्य 17:10 पर गौर करें: “वे सात राजा भी है, पांच तो हो चुके हैं, और एक अभी है; और एक अब तक आया नहीं, और जब आएगा, तो कुछ समय तक उसका रहना भी अवश्‍य है।” प्रेरित यूहन्‍ना ने ये शब्द पतमुस टापू पर रोम की कैद में लिखे थे। सात राजाओं में जो पाँच हो चुके थे वे थे मिस्र (इजिप्ट), अश्‍शूर, बाबुल, मादी-फारस और यूनान (ग्रीस)। जिस राजा के बारे में उसने कहा था कि एक अभी है, वह छठा राजा रोमी साम्राज्य था जो उस वक्‍त विश्‍वशक्‍ति बना हुआ था। लेकिन रोमी साम्राज्य भी जल्द ही गिरनेवाला था और सातवाँ राजा जो यूहन्‍ना के वक्‍त तक आया नहीं था, वह रोम के राज्यों में से ही निकलनेवाला था। यह सातवीं विश्‍वशक्‍ति कौन होता?Published from Blogger Prime Android App

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