कौन थे आर्य??

डामेज कंट्रोल के लिए आर्य शब्द को पदवी कहा गया. दरअसल आर्य कबीले थे.आर्य जाति है पदवी नहीं. स्वयं #दयानंद ने भी इसे जाति ही माना है.#बाल_गंगाधर तिलक जैसे विद्वानों ने भी आर्यों को विदेशी बताया है.

              #दयापंथी हिंदुत्व को पाखंड बताकर सिंधु घाटी में जो उनके पूर्वजों द्वारा यहाँ के बाशिंदों के साथ किया वही आज भी करते हैं.

    वेदों से इनका कोई सरोकार नहीं ये भड़काऊ ग्रंथ सत्यार्थप्रकाश लेकर मूलशंकर को राम जी से बड़ा बनाने की फिराक में हैं. वास्तव में टुकड़े टुकड़े गैंग यही दयापंथी हैं. देश में धार्मिक उन्माद फैलाना,महापुरुषों की निंदा, हिंदू देवताओं को नकली नोटों का चलन बताना,ईसाईयत और इस्लाम को कोसना तो इनका पेशा है.

          धर्म के नाम पर लड़ना लड़ाना, बाँटना इनका परम धर्म है. अंग्रेजों के बाद यही फूट डालो और राज करो को चरितार्थ कर रहे हैं. नेपथ्य में रहकर ये हिंदू मुस्लिम के बीच कड़वाहट और दंगे के बीज यही दयापंथी बो रहे हैं.

बाकी देश के आम हिंदु मुस्लिमों के बीच सद्भाव है,प्रेम है.

    पता नहीं इतनी नफरत दयापंथी कहाँ से लाते हैं??

भारत के प्रसिद्ध विद्वान बाल गंगाधर तिलक ने अपनी विख्यात पुस्तकें “आर्कटिक होम इन दी वेदांत” में यह सिद्ध किया है कि आर्य उत्तरी ध्रुव प्रदेश के रहने वाले थे। उन्होंने ऋग्वेद तथा जेंद अवेस्ता का गहन अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि इनमें जो प्राकृतिक दृश्य का वर्णन किया गया है वे सब उन दिनों उत्तरी ध्रुव में मिलते थे। ऋग्वेद में इस बात का उल्लेख मिलता है कि आर्यों के आदि स्थान पर बहुत शीत पड़ती थी। वहां 6 महीने का दिन तथा 6 महीने की रात होती थी। ऐसा केवल उत्तरी ध्रुव प्रदेश में ही संभव था।

महर्षि स्वामी दयानंद ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में आर्यों का मूल निवास स्थान तिब्बत बताया है। उनके अनुसार ये लोग सूर्य तथा अग्नि के उपासक थे क्योंकि वे ठंडे देश के निवासी थे। यह ठंडा प्रदेश तिब्बत ही हो सकता है। इसके अतिरिक्त ऋग्वेद में जिन वृक्षों तथा पशु पक्षियों का उल्लेख किया गया है वे सभी उस समय तिब्बत में उपलब्ध थे। धीरे-धीरे उनकी जनसंख्या बढ़ गई तो उनका इस छोटे से देश में निर्वाह करना कठिन हो गया अपने पड़ोसी देश में जा बसे। यहां की जलवायु तथा भूमि उनके अनुकूल थी।

अंत में चंद सवाल:

(i) यदि आर्य सप्तसिंधु प्रदेश के निवासी थे और सिंधु घाटी सभ्यता आर्यों की थी तो उन्हें ऐसे उपजाऊ प्रदेश को छोड़कर जाने की क्या आवश्यकता थी?

(ii) ऋग्वैदिक में आर्य तथा दासों के मध्य हुए लड़ाइयों से क्या ज्ञात होता है?? 

(iii) ऋग्वैदिक में कुछ ऐसे भौगोलिक भागों तथा वृक्षों आदि का उल्लेख मिलता है जो कि सप्त सिन्धु प्रदेश में नहीं होते थे। इन बातों से स्पष्ट है कि आर्य विदेश से भारत आए थे.आप आँखें मूँद क्यों लेते हैं.Published from Blogger Prime Android App

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