विनाश का पुत्र 28
☦विनाश का पुत्र🔯
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Vol:28
ईसा के समय में भी अर्थात new testamentकाल में संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका के उत्तरी देश और पूर्व में एशिया माइनर तथा पलिसतीन देश रोमन साम्राज्य के आधीन था.रोम के प्रशासन के अंतर्गत अलग अलग क्षेत्रों में उसी के गवर्नर नियुक्त होते थे.
रोमी गवर्नर अगस्तुस कैसर की आज्ञा से युसूफ और मरियम को नाम लिखाई के लिए गलील से पुरखों के मूल नगर बैतलहम आना पड़ा. हजारों साल की धार्मिक शास्त्रों की भविष्यवाणियों के अनुसार ईसा का जन्म बैतलहम में ही हुआ. हेरोदेस गवर्नर के आदेश कि दो साल से कम उम्र के बालकों का कत्ल हुआ था.ईसा को बचाने के लिए युसुफ को मिश्र(एजिप्ट)भागना पड़ा.
गवर्नर पिलातुस ने ही ईसा को सूली पर लटकाने आदेश न चाहते हुए दिया. रोमन साम्राज्य"पैशान" धर्म को मान्यता देता था. यूनानी राज्य हमेशा से रोमी साम्राज्य का विरोध करता रहा. यूनानी सभ्यता का प्रभाव सबसे अधिक होने के कारण यूनानी देवताओं को भी संरक्षण मिला. रोमी साम्राज्य में सभी देवताओं को संरक्षण मिला लेकिन ईसा पर ईश विरोधी होने का इल्जाम लगा.षड्यंत्र हुआ.
तात्कालीन समय में रोमन साम्राज्य के विजित राज्यों की गलियों, चौराहों पर बाल देवताओं की मूर्तियां सजती और स्थापित होती थीं. रोमन साम्राज्य के शिखर काल में रोमी सम्राटों ने अपनी मूर्तियां भी देश के सभी स्थानों, धार्मिक स्थलों में लगवाई.और उन्हें भी देवताओं की तरह पूजा गया.
रोमी साम्राज्य में ईसा और उनके शागिर्दों पर बड़े जुल्म ढाये गए. अनुयायियों को सताया गया, सिंह की मांदों, खौलते तेल और आग में जलाया गया. पत्थरवाह किया गया. पतरस को येरुशलम में बंदी बनाकर रखा गया. वहीं उनकी शहादत हुई. स्तेफनुस का पत्थर वाह हुआ.. रोमन बादशाह नीरो ने क्रूरता की हदें पार की.रोम में मसीहियों को चुन चुनकर जलाया गया. अराधनालयों को ध्वस्त करने का आदेश हुआ. दुआएं, प्रार्थनाएं मसीहियों पर प्रतिबंध लगाया गया. जुल्म के बावजूद ईश्वर उनके साथ था मसीहियत फैलती गई. बाद में रोमन सम्राट कान्सटेनटिनोपल के मसीहियत स्वीकारने के पश्चात ईसाईयत रोमन राज्य का राजधर्म बन गया.
दानिएल भविष्यवक्ता की भविष्यवाणी कि मूर्ति के पैरों पर विशाल चट्टान की चोट हुई और मूर्ति ध्वस्त हुई. वह चट्टान स्वयं ईसा ही हैं......
क्रमशः।।
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