ईसाइयों का परमेश्वर मनोविकारी है..

ईसाइयों के ईश्वर क्रोध करनेवाले हैं!!!

यह तो मनोविकार है..

             गुनाह के प्रति परमेश्वर की असहिष्णुता उसकी विशिष्ट हस्ती है; परमेश्वर का क्रोध उसका विशिष्ट स्वभाव है; परमेश्वर का प्रताप उसकी विशिष्ट हस्ती है। परमेश्वर के क्रोध के पीछे का सिद्धान्त उस पहचान और हैसियत को दर्शाता जिसे सिर्फ उसने धारण किया है।

       ईश्वर के धर्मी स्वभाव के प्रदर्शन का एक पहलू है, फिर भी परमेश्वर का क्रोध अपने लक्ष्य के प्रति विवेकशून्य या सिद्धान्तविहीन बिलकुल भी नहीं है। इसके विपरीत, परमेश्वर क्रोध करने में बिलकुल भी उतावला नहीं है, न ही वह अपने क्रोध और प्रताप को जल्दबाजी में प्रकट करता है। इसके अतिरिक्त, परमेश्वर का क्रोध विशेष रूप से नियन्त्रित और और नपा-तुला होता है.

         परमेश्वर का स्वभाव उसकी स्वयं की अंतर्निहित हस्ती है,जो अद्वितीय है. यह समय के गुज़रने के साथ बिलकुल भी नहीं बदलता है, उसका अंतर्निहित स्वभाव उसकी स्वाभाविक हस्ती है। इसके बावजूद कि वह किसी पर अपने कार्य को क्रियान्वित करता है, क्योंकि उसकी हस्ती नहीं बदलती है, न ही उसका धर्मी स्वभाव बदलता है।Published from Blogger Prime Android App

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