न घबरा ना फिकर कर..

❇न घबरा, न फिकर कर......

ऐ इंसां किस बात का डर है तुम्हें?और चिंता किस बात की?

क्या तुझे मौत डरा सकती है?क्या तुम्हें अपने जीवन की फिकर है?किससे तू घबराता है?किसकी चिंता है तुम्हें?

तू ना डर,न घबरा, न फिकर कर ।

क्योंकि"जो कुछ हुआ वह इससे पहले भी हो चुका है और जो होने वाला है वह हो भी चुका है"सभो.3:15

मौत से क्या डरना जो तय है....

तू पैदा क्यूँ हुआ?

पैदा हुआ तो तेरी मौत निश्चित है।

तू अपनी चिंता करके अपने पकते बाल और गाल की चमक, भाल की झुर्रियां छुपा सकता है?

अपने जीवन का आनंद कर..अपने जीवन की चिंता करना हवा को पकड़ना है,मृत्यु का खौफ ब्यर्थ है।

सभो.3:12"मैंने जान लिया कि मनुष्य के लिए आनंद करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय कुछ भी अच्छा नहीं...।"

भलाई कर भला होगा, बुराई कर बुरा होगा.।

डरना है तो उस रब से डर.क्योंकि जिसने भी उससे डरा है फिर कभी किसी से नहीं डरा है।चिंता कर तो उसी की कर.क्योंकि तेरी फिकर वही करता है।Published from Blogger Prime Android App

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