ईश्वर बूढ़े हो गए हैं!!??

✨एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर ईश्वर से मिलने की जिद किया करता था। उसे ईश्वर के बारे में कुछ भी पता नही था पर मिलने की तमन्ना भरपूर थी।उसकी चाहत थी कि ईश्वर मिले तो एक समय की रोटी वो ईश्वर के सांथ खायेगा।

एक दिन उसने थैले में 5-6 रोटियां रखीं और परमात्मा को ढूंढने निकल पड़ा

चलते चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया।

उसने देखा नदी के तट पर एक बुजुर्ग माता बैठी हुई हैं, जिनकी आँखों में  गजब की चमक थी, प्यार था,और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहां बैठी उसका रस्ता देख रहीं हों।

वो 6 साल का मासूम बुजुर्ग माता के पास जा कर बैठ गया, अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया।

फिर उसे कुछ याद आया तो उसने अपना रोटी वाला हाँथ बूढ़ी माता की ओर बढ़ाया और मुस्कुरा के देखने लगा, बूढी माता ने रोटी ले ली , माता के झुर्रियों वाले चेहरे पे अजीब सी ख़ुशी आ गई आँखों में ख़ुशी के आँसू भी थे,,,,

बच्चा माता को देखे जा रहा था , जब माता ने रोटी खा ली बच्चे ने 1 और रोटी माता को दी।

माता अब बहुत खुश थी। बच्चा भी बहुत खुश था। दोनों ने आपस में बहुत प्यार और स्नेह के पल बिताये।

जब रात घिरने लगी तो बच्चा इजाजत ले घर की ओर चलने लगा ..वो बार बार पीछे मुड कर देखता ! तो पाता बुजुर्ग माता उसी की ओर देख रही होती।

बच्चा घर पहुंचा तो माँ ने अपने बेटे को आया देख जोर से गले से लगा लिया और चूमने लगी, बच्चा बहुत खुश था। माँ ने अपने बच्चे को इतना खुश पहली बार देखा तो ख़ुशी का कारण पूछा, तो बच्चे ने बताया !

माँ,....आज मैंने ईश्वर के साथ बैठ कर रोटी खाई, आपको पता है उन्होंने भी मेरी रोटी खाई,,,माँ ईश्वर बहुत बूढ़े हो गये हैं,,,मैं आज बहुत खुश हूँ माँ◆◆◆


उस तरफ बुजुर्ग माता भी जब अपने घर पहुंची तो गाँव वालों ने देखा माता जी बहुत खुश हैं,तो किसी ने उनके इतने खुश होने का कारण पूछा????

माता जी बोलीं,,,,मैं 2 दिन से नदी के तट पर अकेली भूखी बैठी थी,,मुझे पता था ईश्वर आएंगे और मुझे खाना खिलाएंगे।

आज ईश्वर आए, उन्होंने मेरे साथ बैठ के रोटी खाई मुझे भी बहुत प्यार से खिलाई, बहुत प्यार से मेरी और देखते थे, जाते समय मुझे गले भी लगाया,,ईश्वर बहुत ही मासूम हैं बच्चे की तरह दिखाई देते हैं।

           परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध होता है।

1 यूहन्ना 4:12

 और सब का एक ही परमेश्‍वर और पिता है*, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है। और उसने कुछ को प्रेरित नियुक्त करके, और कुछ को भविष्यद्वक्ता नियुक्त करके, और कुछ को सुसमाचार सुनानेवाले नियुक्त करके, और कुछ को रखवाले और उपदेशक नियुक्त करके दे दिया। (2 कुरि. 12:28-29) जिससे पवित्र लोग सिद्ध हो जाएँ और सेवा का काम किया जाए,,,,

इफिसियों 4:6, 11-12Published from Blogger Prime Android App

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