शास्त्रार्थ उनका

#शास्त्रार्थ उनका....

      धार्मिक लफ्फाजों की कॉमन बदमाशी ये होती है की वे दूसरों की कमियाँ निकालकर खुद को बेहतर बताएँगे..लेकिन जब एक्सपोज हो जाते हैं तो उनका सब से पहला पैंतरा यही होता है कि हम गंदे हैं तो क्या हुआ तुम भी गंदे हो. जब कि शुरुआत वे खुद को पाक साफ बताने से करते हैं लेकिन बाद में शोर मचाकर उस बात पर ध्यान नहीं आने देते कि उन्होने खुद को  बेदाग बताया था।

    सामनेवाले को मूर्ख बताकर स्वघोष विद्वान बनने की होड़ मची है.

    शास्त्रार्थ और समीक्षा के नाम पर कुतर्क,आक्षेप और गलौच!!!

    सामनेवाले को विधर्मी, राक्षस बताकर खुद के धर्मी बताने का विज्ञापन!!! #आज_बाजार_में_सोना_औंधे_मुँह_गिरा...इस पर समीक्षा हो तो..

    🤣सोने का मुँह है ही कहाँ कि औंधे मुँह गिरेगा!!!??☺☺

   बस यही है इनका शास्त्रार्थ और विद्वता का स्तर।।।।

    हमारी बातें कुछ विद्वानों को कड़वी लग सकती है लेकिन कोई बात नहीं. सच्ची बातें कड़वी ही होती हैं....

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