आपको ईश्वर पर दे...

#ईश्वर_आपको_पर_दे◆◆◆

असली गुरू वही होता है जो अंधकार से प्रकाश में ले आये.'गु'नाम अंधकार और "रू"नाम प्रकाश, अर्थात जो अंधेरे से प्रकाश में ले आये. आज ऐसे ऐसे गुरूघंटालों की कमी.नहीं है जो उजाले में खड़े आदमी को भी अंधेरे में खींच ले आयें. आज जितने भी कथित धर्म, मत,संप्रदाय, मजहब के अनुयायी हैं. सभी किसी न किसी धर्म ग्रंथो में विश्वास रखते हैं. और तमाम अलग अलग दावे हैं.

        कोई आसमान से उतरी किताब बताता है, कोई ईश्वर की वाणी बताता है, कोई देव वाणी तो कोई सनातन और पुरातन बताकर अपने धर्म ग्रंथों की प्रमाणिकता सिद्ध करने में लगा है. इसमें लिखा सब कुछ भगवान का कहा हुआ है.......

          इनसे ऊपर उठकर एक राज आप जान लें.एक शास्त्र आपके ह्रदय में भी है. उसे भी बांचने का समय निकालें. इसे पढ़ने के लिए आपको पढ़ा लिखा होना,डिग्रीधारी होने की कतई जरूरत नहीं है. उसे पढ़ने के खुद को अकेला छोड़िये और रम जाईये. आप पायेंगे कि लिखी लिखाई ईश्वरीय ज्ञान और ईश वाणी तो सुप्त है जिसे पाने को उदिम चाहिए, प्रपंच चाहिए,कर्मकांड साधना और विधि विधान चाहिए. पादरी चाहिए, मौलाना चाहिए, योग चाहिए, बाबा, पंडित चाहिए,आश्रम, मठ,गुरूकुल, मदरसे,गिरजे चाहिए.

      आप खुद को समय दीजिए, खुद को अकेला छोड़िये "मैं"से साक्षात्कार कीजिए आप ये पायेंगे कि आपके भीतर एक लौ है.उसकी आंच आपको गुनगुना करेगी. आप रोशनी से नहाये होंगे, आप मुस्कुरा रहे होंगे. वहाँ न राग है न द्वेष है न भिन्न भिन्न मत,धर्म मजहब के लोग होंगे।

        आप में ईश्वरत्व होगा जो दया, प्रेम,क्षमा, सहिष्णुता, परोपकार की परोक्ष बात करेगा.यहाँ निर्पेक्षता होगी.आप खुद को ईश्वर के बीच पायेंगे. आपकी मंजिलें दिखाई देंगी. आप अपने भीतर खो जायेंगे. अपने भीतर ही तीर्थ पायेंगे. वेद,बाईबल, कुरान गीता का निचोड़ पायेंगे

           अगर आपकी तुलना चिड़िया से की जाये तो पर ढूंढिये, अगर आप फूल हैं तो महकीये भी.आप रचयिता के बाग की फूल हैं और खूबसूरत भी.तो खूबसूरती तो झलकनी चाहिए.

       ईश्वर आप सबको पर दे और खुश्बुओं से भरे.

    @lok kujur23/08/2020Published from Blogger Prime Android App

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