ईश्वर है तो वह दिखता क्यों नहीं??

ईश्वर है तो वह दिखता क्यों नहीं???

हमने ईश्वर को देखा है.और आप?

ईश्वर हमारे ही मध्य है. 

बाईबल कहती है...

"और सब का एक ही परमेश्‍वर और पिता है*, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।

इफिसियों 4:6

      आँखों से जगत की सृष्टि को देखा जा सकता है, उसका अनुभव किया जा सकता है.लेकिन सृष्टि के कर्ता(ईश्वर)को देखने के लिए गहन अनुभूति चाहिए. ईश्वर पंचेन्द्रियों से नहीं देखा जा सकता. वह भावनुभूतियों से महसूस किया जा सकता है.

         दृष्टि, ध्वनि, गंध,स्वाद और स्पर्श यह पंचेन्द्रिय आयामों से संबद्ध हैं. इसी से एक और पहलू जुड़ी है #अनुभूति।।

लौकिक दुनिया में इसकी गिनती नहीं की जाती.

       ध्वनि को आँखों से नहीं देखा जा सकता, प्रकाश को कानों से नहीं सुना जा सकता बल्कि आँखें इसे देख सकती हैं.

गंध को स्पर्श नहीं किया जा सकता इसे नाक से ही सूंघा जा सकता है.

       ईश्वरोन्मुख आत्मा ईश्वर की अनुभूति करती है. ईश्वर को देखने के लिए अलौकिक आँखें चाहिए. हमारे चारों तरफ अवसाद के कण,आवेश,क्रोध, नफरत, दंभ,झूठ के कण हैं,धुंध हैं जो हमारी अलौकिक दृष्टि को कमजोर करती हैं.

      दीन दुखी, बीमार, लाचार, भूखों, नंगों, प्यासों, असहाय, निर्बलों, लाचारों में ईश्वर है.

    बाईबल कहती है जो कुछ तुमने छोटे से छोटे इन भाईयों के लिए किया वो मेरे लिए किया.

" क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया; मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्दीगृह में था, तुम मुझसे मिलने आए।’Published from Blogger Prime Android App

मत्ती 25:35-36

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