यहोवा ने आदम को अपने स्वरूप में रचा. इसका मतलब ईसाइयों के ईश्वर का स्वरूप भी है??
आर्य समाजियों के द्वारा अक्सर पूछा जाने वाला सवाल... यहोवा ने आदम को अपने स्वरूप में कैसे रचा,क्या यहोवा का कोई स्वरूप है?
अपने स्वरूप में रचा इसका मतलब ईश्वर का कोई स्वरूप होगा!!?
परमेश्वर के "स्वरूप" या "समानता” के होने का अर्थ, सामान्य शब्दों में यह है कि, हमें परमेश्वर के सदृश बनाया गया है। आदम परमेश्वर के साथ इस अर्थ में सदृश नहीं हुआ क्योंकि उसके पास हाड़ मांस और लहू था। पवित्रशास्त्र कहता है कि "ईश्वर आत्मा है" (यूहन्ना 4:24) और इसलिए वह शरीर के बिना अस्तित्व में है। तौभी आदम का शरीर परमात्मा का सूक्ष्म अंश आत्मा था,प्रतिबिंब था.क्योंकि आदम स्वविवेक के साथ ईश्वरीय स्वभाव सहित सृजा गया था और मौत के अधीन नहीं था.अवज्ञ (पाप)आदम के ईश्वरीय स्वभाव और स्वरूप को विकृत कर दिया.
बाईबल अद्वैत की बात करती है."तुम ईश्वर हो"की बात करती है. भारतीय दर्शन भी "अहं ब्रहमोस्मि"की बात करती है.
परमेश्वर के स्वरूप का संकेत मनुष्य के अभौतिक हिस्से की ओर है। यह मनुष्य को पशुओं से अलग कर देता है,इस कारण, मनुष्य परमेश्वर की सारी सृष्टि में, दोनों अर्थात् एक भौतिक शरीर और एक अभौतिक प्राण/आत्मा के साथ अद्वितीय है.
बाईबल दीन,दुखी,लाचार बीमार, कैदी बंदी, भूखों,प्यासों नंगों को ईश्वर का स्वरूप बताती है. इसका कतई मतलब ये नहीं कि ईश्वर नंगा है, भुखा है, लाचार है, बीमार है.
इसीलिए भी बाईबल ये कहती हैपरन्तु “यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला, यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; (नीति. 25:21-22)
रोमियों 12:20
इस आयत पर गौर करें

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