बपतिस्मा क्या है? क्या इससे पाप क्षमा मिल जाता है?
#बपतिस्मा क्या है?
१:बपतिस्मा से पाप क्षमा होती है?
२:ईसाई मुझे गाली गलौच करते हैं तो उन्हें सजा मिलेगी या उनके पाप क्षमा हो जायेंगे?
मेरे अजीज़ आर्य मित्र हमसे यही सवाल दोहराते हैं.
#बपतिस्मा एक संस्कार है. जिसमें बपतिस्मा लेनेवाला अपने अतीत के अपराधों पर पश्चताप करके नई शूरुआत करता है और अपने जीवन को ईश्वर के लिए समर्पित करता है.
वह पाप के लिए खुद को मरा हुआ और नेकी के लिए जिंदा जानता है.ईसाई कहलाना मात्र उद्धार की,पाप क्षमा की गारंटी नहीं है. बपतिस्मा एक अवसर है मन परिवर्तन का, नये जीवन की शुरुआत का.
इसलिए उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नये जीवन के अनुसार चाल चलें। क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है। ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। इसलिए पाप तुम्हारे नाशवान शरीर में राज्य न करे, कि तुम उसकी लालसाओं के अधीन रहो। परन्तु अब पाप से स्वतंत्र होकर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिससे पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है।
रोमियों 6:4, 10-12, 22
क्योंकि पाप की मजदूरी* तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।
रोमियों 6:23
ईसाईयत में बैरियों से भी प्रेम सिखाया जाता है. ईसाईयत में हिंसा के लिए,पाप के लिए कोई स्थान नहीं है. ऐसे में जो ईसाई आपसे गालियां करता है. वह कैसा ईसाई है?ईश्वर के लिए यह गलत है. पाप है अतः आपसे गालियां करनेवाला पाप ही कमाता है.
ईसाईयत अपने पड़ोसियों को अपने समान प्रेम करने की बात कहती है. ऐसे में आप पर गालियाँ करनेवाला ईसाई गलत करता है.
मेरे मित्र आपको लोग यदि गालियां करता है तो इसके पीछे भी कारण होगा. आप आत्मावलोकन करें और अपनी गलती सुधारें.
और ऐसे ईसाइयों से भी अपील है कि आप सच्ची मसीहियत अपनायें.. क्योंकि लिखा है...
"बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो; पर इसके विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। क्योंकि “जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूँढ़े, और उसके यत्न में रहे। यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करनेवाला फिर कौन है? यदि तुम धार्मिकता के कारण दुःख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उनके डराने से मत डरो, और न घबराओ,
1 पतरस 3:9-11, 13-14

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