आत्मा परमात्मा पुनर्जन्म

कर्ता और भोक्ता शरीर ही है.

पीड़ा दर्द शरीर को होता है आत्मा को नहीं. इंसानी प्राणवान शरीर की तुलना पत्थर से!?

    दयापंथियों के कुतर्क और समझ का स्तर सर्वविदित है

पत्थर को मालिश करो पटक़ो..तो कोई फर्क नहीं पड़ता. उसी तरह शरीर जड़ है. शरीर को दुख दर्द नहीं होता.

ये कैसा तर्क है.??

      ◆दयापंथी कहते हैं पीड़ा आत्मा को होती है!!!

नैनम् छिंदन्ती शस्त्राणि नैनम् दहति पावकः

फिर आत्मा पीड़ित कैसे हो सकती है.?

◆प्राण से जड़ शरीर चेतन होता है. आत्मा विवेक का स्रोत है. अविवेकी आत्माहीन होते हैं.

◆कर्ता शरीर है तो भोक्ता भी शरीर होगा.शरीर की भौतिक चिकित्सा होती है. जबकि आत्मा की आध्यात्मिक चिकित्सा होती है.

एक मुहावरा है सुना होगा.

◆विवेक का स्रोत आत्मा है. #आत्मा_का_मर_जाना यह मुहावरा आत्माहीनों के लिए है.

             ◆बुद्धि का संबंध मस्तिष्क से है.

मस्तिष्क पशुओं में भी होता है लेकिन वे अविवेकी होते हैं.

◆शरीर आत्मा का साधन कहना ही गलत है.

◆हमारी बातों का आधार भी बाईबल ही है. हमारे मतभेद सदियों से बने हुए हैं.

अतः यह थोपने की वस्तु नहीं है. लोगों को स्वविवेक का इस्तेमाल करने दिया जाये.

       #थोपना छोड़ो #पूर्वाग्रह त्यागो तो #सत्यग्रही बनोगे.

#मनुर्भव.

      प्राण के बिना शरीर जड़ है. शरीर में प्राण है तो शरीर चेतन है. वह गति कर सकता है.

आपके पैर में काँटें चुभे तो पीड़ा आत्मा को कैसे होगी.??शरीर में जख्म हो तो मलहम आत्मा में लगाओगे या शरीर के जख्म पर??

    शरीर में आत्मा ना हो वह विवेक शून्य होगा जड़वत नहीं.

   हमारे गाँव में एक पागल था. वह खुद के शरीर को जख्मी करता था. वह हमेशा जंजीरों में बंधा होता था.किसी तरह पैरों की जंजीरें छूटी  वह पत्थरों से अपने ही पैरों को कुचल रहा था. पैरों की धज्जियां कर अलग कर दिया था और चीख रहा था.वह विवेक शून्य था.

शरीर में प्राण था तो दर्द से चीख भी रहा था.

           शरीर में प्राण हो तो वह जड़ नहीं है.

क्या आत्मा को भोग विलास सुख की वस्तुएं चाहिए??

भोग और विलासिता तो शारिरिक जरूरतें हैं.

हाँ परमात्मा का आनंद आत्मा भोगती हैं क्योंकि आत्मा का संबंध परमात्मा से है. दोनों पारलौकिक हैं. लौकिक चीजों का संबंध शरीर से है.

       यह अवधारणा कि आत्मा का साधन शरीर है तो सारी बातें उलट पुलट हो जायेंगी और पुनर्जन्म जैसी कयासों पर अटक जायेंगी.Published from Blogger Prime Android App

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