वेदों में वैमानिकी तकनीक है सच या झूठ??
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कुछ लोग कहते हैं कि प्राचीन भारत में विमान बनाने की उन्नत प्रौद्योगिकी उपलब्ध थी। चूँकि रामायण में पुष्पक विमान का बड़ा मनोहर चित्रण है, इसलिएहमारे पूर्वजों के पास वास्तव में विमान प्रौद्योगिकी उपलब्ध थी, ऐसा दावा किया जाता है। परंतु हमें इसे सिद्ध करने के लिए सम्पूर्ण तकनीकी साहित्य की आवश्यकता है, रामायण जैसे काव्यात्मक विवरण की नहीं। दरअसल, विमान एक जटिल उत्पाद है, इसके निर्माण में अत्यधिक उन्नत प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है। अगर हमें यह सिद्ध करना है कि प्राचीन भारत में विमान प्रौद्योगिकी उपलब्ध थी, तो विमान के चित्र, बैठे हुए यात्रियों के तस्वीर दिखाना भ्रामक हो सकता है जबकि सिद्ध करने के लिए यह ढूढ़ना पड़ेगा कि क्या उस समय वायुगतिकी का सिद्धांत, विमान बनाने का डिजाईन, विमान की बॉडी बनाने हेतु सम्मिश्र का निर्माण आदि का ज्ञान उपलब्ध था। इन सभी तकनीकी विवरणों के अभाव में यह दावा करना कि रामायण काल के लोगों को विमान प्रौद्योगिकी का ज्ञान था सर्वथा असंगत है।
प्राचीन भारत में विमान प्रौद्योगिकी के होने के समर्थन में यह तर्क दिया जाता है कि यदि हम महर्षि भारद्वाज की रचना ‘वृहद विमानशास्त्र’ तथा राजा भोज की रचना ‘समरांगण सूत्रधार’ की सही ढंग से व्याख्या करना सीख लें तो तत्कालीन विमान प्रौद्योगिकी का विस्तृत वर्णन प्राप्त हो सकता है। परंतु इन दोनों रचनाओं में भी संतोषजनक विवरण प्राप्त नहीं होता है। प्रसिद्ध खगोलशास्त्री जयंत विष्णु नार्लीकर अपनी पुस्तक ‘साइंटिफिक एज : फ्रॉम वैदिक टू मॉडर्न साइंटिस्ट_ Scientific Age from Vedic to Modern Scientist’ में इन दोनों पुस्तकों की प्रमाणिकता का खंडन कर चुके हैं। उनका कहना है कि यहाँ पर विमान शब्द के बारे में भी भ्रम उत्पन्न हुआ है। ‘विमान हवाई जहाज को भी कहते हैं और बड़े मकानों में सुंदर वास्तुकला का उपयोग करते हुए ऊपरी मंजिल पर निकलने वाली खिड़कियों को भी विमान कहते हैं। राजा भोज की रचना में खिड़की का अनेक स्थानों पर वर्णन है।’ यह ग्रंथ वैमानिक शास्त्र से अधिक वास्तुशास्त्र से संबंधित है
क्रमशः
P.K.
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