कलयुगी एकलब्य अंगूठा नहीं ठेंगा देगा.

#अलोक_पदड़ी_तुम_वेद_क्यों_पढ़ते_हो?

#तुममें_वेद_पढ़ने_समझने_की_योग्यता_नहीं_है.

Bhimsinghbhimsingh Arya जी इतने दिनों तक आपके पूर्वज वेदों पर कुण्डली मारकर बैठे रहे. अब यह सर्वसुलभ आम जनमानस के पहुँच पर है. अब हम वेद पढ़ने समझने लगे हैं तो आपको परेशानी होने लगी है.

        वेद समझना जानना इतना जटिल है!??

वेद को ईश्वर की वाणी कहा जाता है. ऐसे में वेद को सर्वसुलभ, और सरल होना चाहिए.यदि ऐसा है तो वेद अनपढ़ों को भी समझ में आ जानी चाहिए.

        क्या ईश वाणी केवल योग्यता धारियों के लिए ही है??

वेद ज्ञान सबके लिए समान है चाहे पुरुष हो या नारी, ब्राह्मण हो या शूद्र सबको वेद ज्ञान पढ़ने और यज्ञ करने का अधिकार है.

देखें – यजुर्वेद २६.१(26.1), ऋग्वेद १०.५३.४(20.53.4), निरुक्त ३.८(3.8) इत्यादि.

                          दरअसल सच्चाई ये है कि जिसे आप वेद समझने की भूल करते हो वह ऋषियों के अनुभवों का काव्यात्मक संग्रह मात्र हैं.इसमें झोल भी है. जिसे छुपाने के लिए ही आपके पूर्वज #धर्मसूत्र रचते थे यदि कोइ शूद्र वेद सुन ले तो पिघला हुआ शीशा, लाख उसके कान में डाल देना चाहिये।

यदि वह वेद का उच्चारण करे तो जीभ कटवा देना चाहिये। वेद स्मरण करे तो मरवा देना चाहिये।

गौतम धर्म शूत्र 12/6

यदि कोइ ब्राम्हण शूद्र को शिक्षा दे तो उस ब्राम्हण को चान्डाल की भाँति त्याग देना चाहिये।

- स्कंद पुराण 10/19

शूद्र को बुद्धि नहीं देना चाहिए, न यज्ञ का उच्छिष्ट, न हवन का बचा हुआ भाग और न उसे धर्म का उपदेश दें तथा उसे व्रत का भी उपदेश न दें।" घी, दूध, पान और श्रेष्ठ अन्न शूद्रों को नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे ब्राह्मणों को दुख होता है।"

       ईश्वरीय ज्ञान तो अनपढ़ भी स्वानुभव से हासिल कर लेता है.

एकलव्य ने जैसे धनुर्विद्या हासिल किया.

       अब आम जनमानस भी आपके वेद जानने समझने लगा है. तो आप जैसे द्रोणाचार्य अंगूठे माँगने लगे हैं.

           आर्यश्रेष्ठ कलयुग है अब #कलयुगी_एकलव्य अंगूठे नहीं देंगे.

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