परमेश्वर को आपकी चिंता है..

#खुदा_को_आपकी_फ़िकर_है◆◆●
 दुनिया के पहले मोबाइल का बुनियादी काम सिर्फ कॉल करवाना था.... इस में कोई दूसरा आप्शन न था.... फिर एस एम एस एड हुआ....एम एम एस फिर इंटरनेट.... फिर दुनिया की हर चीज़ को मोबाइल में शिफ्ट कर दिया गया.... आज मोबाइल से दुनिया का शायद ही कोई ऐसा काम हो जो न लिया जा रहा हो.....
मगर यह मोबाइल आज भी अपना बुनियादी काम नहीं भूला....
आप कोई गेम खेल रहे हों, या फिल्म देख रहे हों, इंटरनेट सर्फिंग कर रहे हों, या विडियो बना रहे हों या फिर एक वक़्त में दस काम भी क्यों ना कर रहे हों.....
तो जैसे ही कोई कॉल आए मोबाइल फौरन से पहले सबकुछ छोड़ कर आपको बताता है कि कॉल आ रही है यह सुन लें, वह अपने सारे काम रोक लेता है....
              और एक इंसान जिसे परमेश्वर ने अपनी संगति के लिए बनाया और सारी कायनात को उसकी खिदमत के लिए सजा दिया, वह खुदा की कॉल पर दिन भर में कितनी बार अपने काम रोककर ईश्वर की सुनता है??
       वह खुदा की ओर पीठ किये है.
काश इंसान मोबाइल से इतना सा ही सबक़ सीख ले ले.जिसे हमने खुद इजाद किया और एक लम्हा भी खुद से जुदा नहीं करते......!!
       दुनिया के हर जायज़ काम करो मगर अपनी पैदाइश का बुनियादी मकसद खुदा की इबादत कभी न भूलो..इबादत गाह जब भी इबादत के लिए जाओ ऐसा करो सब पीछे छोड़ दो.
        आप दुनिया दारी से डिस्कनेक्ट हो जाओ रब से जुड़ जाओ,भूल जाओ आपको दर्द भी है, सारे फिकर पीछे छोड़ दीजिये. क्योंकि आपकी फिकर रब कर लेगा.
 *अपनी सारी फ़िक्र उसी पर डाल दो, क्यूँकि उसको तुम्हारी फ़िक्र है। तुम होशियार और बेदार रहो; तुम्हारा मुख़ालिफ़ इब्लीस गरजने वाले शेर — ए — बबर की तरह ढूँडता फिरता है कि किसको फाड़ खाए। अब ख़ुदा जो हर तरह के फ़ज़ल का चश्मा है, जिसने तुम को मसीह ईसा में अपने अबदी जलाल के लिए बुलाया, तुम्हारे थोड़ी मुद्दत तक दुःख उठाने के बाद आप ही तुम्हें कामिल और क़ाईम और मज़बूत करेगा। हमेशा से हमेशा तक उसी की सल्तनत रहे। आमीन।*
1 पत 5:7-8, 10-11
 *किसी बात की फ़िक्र न करो, बल्कि हर एक बात में तुम्हारी दरख़्वास्तें दुआ और मिन्नत के वसीले से शुक्रगुज़ारी के साथ ख़ुदा के सामने पेश की जाएँ। तो ख़ुदा का इत्मीनान जो समझ से बिल्कुल बाहर है, वो तुम्हारे दिलो और ख़यालों को मसीह 'ईसा में महफ़ूज़ रखेगा। ग़रज़ ऐ भाइयों! जितनी बातें सच हैं, और जितनी बातें शराफ़त की हैं, और जितनी बातें वाजिब हैं, और जितनी बातें पाक हैं, और जितनी बातें पसन्दीदा हैं, और जितनी बातें दिलकश हैं; ग़रज़ जो नेकी और ता 'रीफ़ की बातें हैं, उन पर ग़ौर किया करो। हमारे ख़ुदा और बाप की हमेशा से हमेशा तक बड़ाई होती रहे आमीन*
फ़िलि 4:6-8, 20Published from Blogger Prime Android App

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