वैदिक धर्म में नारियों की हैसियत.


#वैदिक_धर्मियों के बीच स्त्री की क्या हैसीयत थी यह छुपा नहीं है.


      आर्य खुले आम सबके सामने मैथुन करते थे.इनके ऋषि कुछ धार्मिक अनुष्ठान करते जिन्हें वामदेव-विरत कहा जाता था.. यह यज्ञ भूमि पर ही की जाती थी. यदि कोई स्त्री पुरोहित के सामने करने की इच्छा प्रकट करती तो वह उसके वहीं सबके सामने रति क्रीड़ा करता था. #महर्षि ने इसीलिए भी पुजारियों को ब्याविचारी और पुजारिनों को परपुरुष गामी बताया है.Published from Blogger Prime Android App

उदाहरणार्थ पराशर ने सत्यवती और घिर्घत्मा के साथ यज्ञ स्थल पर ही संभोग किया.

आर्यों में योनि अयोनि नामक प्रथा प्रचलित थी. तात्कालिक में योनि अर्थात #घर_अयोनि का अर्थ ऐसा गर्भ जो घर के बाहर ठहराया गया हो. अयोनि प्रथा तत्समय में गलत नहीं मानी जाती थी. सीता और द्रौपदी का जन्म अयोनि प्रथा से ही हुई थी.

       आर्यों में औरत को भाड़े(किराये) पर दिया जाता था. #माधवी प्रसंग इसका स्पष्ट प्रमाण है. राजा ययाति ने अपनी बेटी माधवी को अपने गुरु गालव को भेंट दे दिया था. गालव ने माधवी को तीन राजाओं को भाड़े पर दिया. इसके पश्चात गालव ने माधवी का विवाह विश्वमित्र से कर दिया. वह विश्वमित्र के पास तब तक रही जबतक उसने एक पुत्र को जन्म नहीं दिया.यह सब कुछ होने के बाद गालव ने माधवी को वापिस लेकर उसके पिता को लौटा दिया.

             वैदिक आर्यों के बीच सहोदर और नजदीकी रिश्तेदारों से वैवाहिक संबंध स्थापित होते थे.अथर्ववेद १८:१:१३

  स्त्रियों को भोग की वस्तु समझा जाता था, लूट की वस्तु समझकर राजा को हिस्से देकर तेल की कुप्पियों घी आदि के साथ आपस में बाँट दी जाती थीं

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