आर्यों को विदेशी माना जाये..

#तो_आर्यों_को_बाहरी_विदेशी_मान_लिया_जाये????●●●

पहला हाथी हड़प्पाइयों का है। दूसरा हाथी मौर्यों का है। हड़प्पाइयों को, मौर्यों को हाथी की जानकारी थी। किंतु आर्यों को हाथी की जानकारी नहीं थी।Published from Blogger Prime Android App


मध्य एशिया के पूरे इलाके में हाथी नहीं थे। आर्य लोग जब भारत आए, तब वे हाथी से परिचित हुए। वे आश्चर्य में थे कि भारत में ये कैसा पशु है? इसको तो हाथ है। वे सूंड़ की तुलना हाथ से किए और हाथी का नाम मृग हस्तिन रख दिए। वे मृग ( पशु ) से परिचित थे। किंतु हाथी से नहीं थे।Published from Blogger Prime Android App


मृग हस्तिन का अर्थ हुआ - हाथ वाला पशु। मृग का प्राचीन अर्थ पशु है। बाद में इसका अर्थ हिरण हुआ। शाखामृग ( बंदर ), मृगराज ( सिंह ) जैसे शब्दों में मृग हिरण का नहीं, पशु का वाचक है।


मृग हस्तिन ही हस्तिन, फिर संस्कृत में हस्ती ( हाथी ) हुआ। अशोक काल में हाथी को गज कहा जाता था। दूसरे चित्र में हाथी के नीचे ब्राह्मी में गजतमे लिखा हुआ है। यह अभिलेख अशोक का है।


जैसा कि आप जानते हैं कि अरब के लोग इमली से परिचित नहीं थे। भारत आकर जब वे इमली से परिचित हुए, तब वे इमली का नाम अरबी में तमर - ए - हिंद रखा। तमर - ए - हिंद का मतलब हिंद ( भारत ) का खजूर। वे खजूर से परिचित थे। किंतु इमली से नहीं थे। इसीलिए वे इमली को तमर - ए - हिंद बोले। यहीं अंग्रेजी में Tamar - ind ( इमली ) है अर्थात Tamar of India.


ठीक अरबों की तरह आर्यों ने भी हाथी से परिचित नहीं होने के कारण वे गज को मृग हस्तिन कह बैठे।

        एक गज द्रविड़ का है, जिसका अर्थ हाथी होता है। दूसरा गज़ फारसी का है, जो लंबाई नापने का पैमाना होता है। लंबाई नापने में हाथ का भी इस्तेमाल होता है। एक गज़ में ज के नीचे बिंदु है, दूसरे में नहीं है। आखिरकार गज को गज़ में तब्दील करने का श्रेय भी ईरान क्षेत्र को है, जिधर से वे आए थे।

     आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि गणेश के नामों में हस्ती /हाथी न जुड़कर गज जुड़ा है - गजानन, गजवदन, गजमुख, गजवक्र, गजकर्ण, गजवक्त्र आदि। इससे गणेश की परिकल्पना को आसानी से समझा जा सकता है।

        Rajendra Prasad Singh जी

आर्य बाहर से ही आए थे क्योंकि वह हाथी और भैंस से अपरिचित थे । सिंधु-सभ्यता में आकर उन्होंने हाथी देखा और नाम रखा हस्तिन ! यदि आर्य भारत के ही होते तो वह भी सिन्धुवासियों की तरह स्वाभाविक रूप से हाथी को गज,  गजानन, गजवदन, गजमुख कह रहे होते ।

ऋग्वेद आर्यों द्वारा कहे हस्तिन शब्द का साक्ष्य देता है..हस्त से हाथ हस्ति से हाथी.हाथी=हाथों वाला पशु🙄🙄🙄

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