वैदिक धर्म माँसाहार और मनु महराज

कृष्ण के जीवन में कहीं भी माँसाहार का उल्लेख नहीं है. गोभक्षक वैदिक धर्मियों से कृष्ण ने युद्ध किये और हजारों आर्यों की धुनाई कुटाइ छटाई के बाद वैदिक गोभक्षकों के आराध्य इंद्र को बंदी बना लिए.

उसके बाद ही समझौता हुआ कि अब वैदिक यज्ञ में गाय नहीं काटा जाएगा.

लेकिन राम दसरथजी विश्वामित्र वशिष्ट याज्ञवल्क्य परासर आदि के अनेकों मांसाहार के वर्णन शास्त्रों में हैं.

मनु ने बेशक सामान्य आदमी को मांसाहार से वंचित करने के लिए नियम बनाए मांस के खरीद बिक्री पर प्रतिबंध की बात किये.परंतु यह नियम सिर्फ शूद्रों वैश्यों के लिए था.

आर्यों के लिए पूरे मांसाहार अनिवार्य किये मनु ने क्योंकि नित्य यज्ञ अनिवार्य था आर्यों के लिए और यज्ञ में मांसाहार अनिवार्य किये मनु ने।Published from Blogger Prime Android App

 महर्षि मनु ने वैदिक ब्राह्मणों के लिए पशुबध करना पुण्य कार्य और मारे गए पशु और उनके मांस खाने वाले यज्ञकर्ता दोनो के लिए मोक्षदायक बताए.


शूद्रों पर पाबंदी इसलिए थी कि सभी मांस खाने लगेंगे तो ब्राह्मणों के यज्ञ के लिए पशुओं का किल्लत हो जाएगा।Published from Blogger Prime Android App

वैदिकों के सारे पशुरक्षा का उद्देश्य इतना ही था कि हमारे लिए यज्ञ में पशु बलि मांस की किल्लत ना हो।

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