समस्याओं से भागना कायरता है.
*समस्याओं से भागना कायरता है|*
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प्रकाशितवाक्य 21:8 में लिखा है --"-डरपोंक आग़ की झील में डाले जायेंगे|"
विश्वासी कभी डरपोक नहीं हो सकता.डरता वही है जो गलतियां करता है. चोर उजाले से डरता है मगर अंधेरे में वह सीना तानकर चलता है.एक विश्वासी को डर कैसा?और अगर विश्वासी डरपोक है तो समझो खोट है.
कलाम कहता है कि धर्मी जवान सिंहों के समान हैं| यहुन्ना अपनी पत्री में लिखता है, जो भयभीत रहता है वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ है| किसी धर्मवैज्ञानिक का कथन है--या तो भय विश्वास को ख़त्म कर देगा; या विश्वास भय को| दोनों में से एक ही का वज़ूद संभव है| भजन 55:4 में लिखा है ---मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है; और मृत्यु का भय मुझमें समा गया है| पद छ: में लिखा है ---मैंने कहा भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते; तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता| समस्याओं के दौरान आपके पास दो ही विकल्प होते हैं| पहला—पलायनवाद| समस्याओं से भागना| दूसरा—समस्यों का सामना करना| समस्या कितनी भी बड़ी हो.अगर राई के दाने के बराबर भी ईमान बची हो तो,आप हिम्मत न खोयें. समस्या आपके लिए बड़ी हो सकती है, मगर परमेश्वर के लिए नहीं| गतसमनी में येशू का पसीना लहू की बूंदों की तरह टपक रहा था| येशू ने कहा--"मेरा मन व्याकुल है, यहां तक की मेरा प्राण निकला चाहता है| "लेकिन येशू ने पलायनवाद का मार्ग नहीं अपनाया| यदि उसके अन्दर क्रूस की दर्दनाक मौत का अहसास था; तो उसके द्वारा विजय मिलने का विश्वास भी था| अन्दर की आग़ बुझने ना दें| जीतने का जज़्बा ज़िन्दा रखें| जय का उत्सव आपका इंतज़ार कर रहा है| 
वौल्टर भाई welcome....
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