तुम ईसाई क्यों बने??

#आलोक_कनखजूरे_तुमने_ईसाईयत_क्यों_स्वीकारा?
👉सच सच बताओ तुम्हारे साथ कौन से चमत्कार हुए थे?
👉तुम्हें कितने पैसे मिले?ईसाई बनाने के कितने पैसे मिलते हैं?
👉दो बोरी चावल और पैसे में तुमने धर्म बदल दिया!!थू है तुम पर....सच्चाई बताओ???
           हम कैथोलिक ईसाई परिवार में ही जन्मे और बड़े हुए. ताऊ पादरी भी हैं.लेकिन कभी हमारा लगाव ईसाईयत से नहीं रहा.मैंने कभी बाईबल ढंग से नहीं पढ़ी.विशेष त्यौहारों में ही घरवालों के कहने पर ही बेमन से चर्च जाता था.
             संगीत प्रेमी होने के कारण गाँव और दूर से भी रामायण मण्डली के लोग मुझे आमंत्रित करते थे.हम ढोलक और तबले पर संगति करते करते रामचरित मानस के टीके भी कहने लगे.
           वहाँ मुझे बड़ा सम्मान मिलता था और लोग तारीफ भी करते कि देखो इसके ताऊ पादरी हैं और ये रामायण के टीके कहता है, ढोल तो अच्छा बजाता ही है. इतनी तारीफ सुनकर मुझे अच्छा लगता..
      हर टीके के बाद चिलम घुमाया जाता,बीच बीच में मुनक्के की चाय बंट जाती.Published from Blogger Prime Android App
         नवधा रामायण प्रतियोगिता में हमें दूसरा जिला जाना हुआ. वहीं हमारी मुलाकात एक सज्जन पुरुष से हुई. वहीं से हमारा परिचय गायत्री परिवार के जरिए आर्य समाज के महामंत्री से हुआ और हम आर्य समाज के वक्ताओं के लिए भाषण तैयार करने लगे.ईसा,मुहम्मद और हिंदू देवी देवताओं और मान्यताओं पर कटाक्ष सीखते #सत्यार्थप्रकाश का स्वध्याय वहीं से हुआ. दो सालों तक समझ समझ कर सत्यार्थप्रकाश पढ़ा.हिंदुओं, ईसाइयों और मुसलमानों के खिलाफ मन में विद्वेष भरने के लिए पत्रिकाएं, लेख और प्रोपेगैंडा वीडियो उपलब्ध कराया जाता.
      आर्य समाज से विरक्ति के बाद से हम इन्हें दयापंथी कहते हैं.
 हम दयापंथियों के साथ मिलकर कभी सनातनियों की आस्था पर ठट्ठे करते थे, कभी ईसाईयत और बाईबल पर झूठ बोलकर कुतर्कते थे कभी दयापंथियों की सभा में पादरियों और मौलानाओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण करते थे. इस्लाम के लिए नफरत बोते थे.मंच से उतरते ही छ:सौ इक्यावन रु. मिल जाते थे.
     हमसे ज्यादा झूठ नहीं बोला गया. हमने झूठ और दयापंथियों को बाय बाय कह दिया. यही सच्चाई है. अब दयापंथी इसीलिए हमपर खार खाते हैं.
     हम दयापंथियों के और भी पोल पट्टी खोल सकते हैं.
अभी के लिए इतना ही.
     सच्चाई जानने के लिए हमने बाईबल पढ़ना शूरु किया और ठीक उसके उलट पाया जो हम सब मिलकर झूठ और कुतर्क करते थे.जो अर्द्ध सत्य और संदिग्ध ज्ञान सत्यार्थप्रकाश में है. वह दयानन्द की अतिमहत्वकांक्षा  और स्वघोष विद्वता का नमुना भर है.
       हमें ईसा की तालीमें अच्छी लगीं और हम बड़े प्रभावित हुए. अब हम ईसा की तालीमों को व्यवहारने की कोशिश करते हैं तो लोग हमें ईसाई कसाई कहते हैं. हमें बिका हुआ बताते हैं. दो बोरी चावल का लालची बताते हैं.जयचंद और ना जाने क्या क्या कहते हैं....हमें वेद विरोधी बताया जाता है.हम वेद विरोधी कतई नहीं हैं. सारे आक्षेप और आरोप बेबुनियाद हैं. यही सच्चाई है.
              हम तो गीता की कद्र भी जानते हैं, हम अब सभी धर्म शास्त्रों का समेकित स्वध्याय करते हैं.
अभी तक हमने जो जाना वह यह है कि सभी धर्म शास्त्रों में चंद मतभेदों को छोड़ दिया जाये तो समानताएं ज्यादा हैं. ईश्वर एक है. धर्म एक है.
हमारा स्व अनुभव यह है जैसे
        हमारा कम्प्यूटर ठीक ठाक काम कर रहा होता है कि परिहार्य, अपरिहार्य कारणों से उसमें वायरस आ ही जाते हैं और कम्प्यूटर की प्रणालियों, फाईलों को प्रभावित कर उसे करप्ट कर देते हैं तथा उसे ठीक से फंक्शन करने नहीं देते.
       कम्प्यूटर बनाने वाला खुद वायरस नहीं बनाता मगर वायरस का तोड़ एंटीवायरस जरूर ईजाद कर सकता है. एंटीवायरस इंस्टॉल होते ही यह वायरस को ढूंढ ढूंढ कर खत्म कर देता है. करप्ट फाईलें ठीक होने से हमारा कम्प्यूटर फिर से अच्छा काम करने लगता है.
       दरअसल हरेक मानव शरीर कम्प्यूटर ही हैं. जिसका निर्माता परमेश्वर है. पाप और बुराईययों का वायरस इंसान के ईश्वरीय प्रणालियों, फाईलों,इंटर्नल सॉफ्टवेर्स को करप्ट करती हैं और खराब करती हैं.
     परमेश्वर ने अपने कम्प्यूटर (मानवों)को वायरस अटैक से बचाने के लिए समय समय पर तमाम एंटीवायरस ईजाद किया है.भगवान/ऋषि/नबी/पैगंबर/रब्बी/अवतार/संत/समाज सुधारक/महात्मा आदि ये परमेश्वर के द्वारा ईजाद एंटीवायरस ही हैं
   ब्रांडेड एंटीवायर्स:#राम,#कृष्ण,#बुद्ध,#महावीर,#ईसा,#मुहम्मद,#कबीर..... इनमें से जो कारगर लगें आप इंस्टॉल कर लें और करप्ट फाईलों, प्रणालियों को ठीक कर लें.
     मेरा कारगर एंटीवायरस #ईसा हैं. और आपका????
            ।।आलोक//

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