वैदिक संस्कृति में सहोदर वैवाहिक संबंध होते थे

वैदिक काल से पहले ही भाई अपनी बहन का पतिभाव से भरण पोषण करता था.

किं_भ्रातासद्यद`नाथं भवति किमु स्वसा यन्निरृतीनिर्गछित्।

काममूति बह्वे३तद्रपामि तन्वां मे तन्व सं पिंपृग्धि।।

अथर्ववेद१८:१:१२

       यहाँ भ्राता लक्ष्य है भातृ और भर्तृ ये दोनों शब्द भृ या भरना पालन करना मूल धातु से निकले हैं.इन दोनों शब्दों का अर्थ है पालन करनेवाला,रक्षण करनेवाला इसमें भ्रातृ रूप भर्तृ रुप से पुराना है.भाई का भ्रातृ नाम अति प्राचीन वैदिक काल से ही प्रचलित है.भाई पति भाव से बहन का भरण पोषण रक्षण करता था.

         स्वसृ शब्द भी यही इतिहास बताता है.स्वान् सरति अनुगच्छति इति स्वसा.

स्वयं के कुल में उत्पन्न भाईयों का जो अनुसरण करती है वह स्वसृ है.भाई से वह पतिभाव से रह सकती है.इस सहोदर वैवाहिक संबंध की वजह से वह सनाथ अर्थात सुरक्षित हुआ करती थी.यही मूल इतिहास है.Published from Blogger Prime Android App

    आज दयापंथी ऐतिहासिक तथ्यों को झुठलाकर सत्य से मुँह चुराते हैं.

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