सत्य-३

।।सत्य।।

             पीलातुस ने प्रश्‍न किया, "सत्य क्या है?" यह प्रश्‍न अभी तक के इतिहास में गूँज रहा है। 

पूरी वास्तविकता यह है कि पिलातुस ने दो हज़ार वर्ष पहले सुबह के समय सभी तरह के सत्यों की उत्पत्ति करने वाले के मुँह के ऊपर सीधे ही देखा था। गिरफ्तार होने के कुछ समय के पश्चात् और राज्यपाल के पास लाए जाने से पहले, यीशु ने एक सरल वक्तव्य "मैं सत्य हूँ" (यूहन्ना 14:6) दिया था, जो अपेक्षाकृत एक अविश्‍वसनीय कथन था। कैसे एक साधारण व्यक्ति सत्य हो सकता था? यदि यह नहीं हो सकता था, यदि वह एक मनुष्य से बढ़कर नहीं होता, परन्तु यही तो वह था, जिसका वह दावा कर रहा था। सच्चाई यह है कि यीशु का दावा उस समय वैध ठहरा जब वह मृतकों में से जीवित हो उठा (रोमियों 1:4)।Published from Blogger Prime Android App

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