सत्य-२

।।सत्य।।

गिरफ्तार होने के पश्चात् सत्य को पहले हन्ना नाम के एक व्यक्ति के सामने ले जाया गया, जो यहूदियों का पूर्व में एक भ्रष्ट महायाजक था। हन्ना ने जाँच पड़ताल के समय कई यहूदी व्यवस्थाओं को तोड़ा, जिसमें उनके घर पर ही मुकदमा चलाने, प्रतिवादी के विरूद्ध आत्म-आरोपों को प्रेरित करने और प्रतिवादी को मारने का प्रयास किया जाना इत्यादि सम्मिलित है, जो उस समय कुछ नहीं करने का दोषी था। हन्ना की जाँच के पश्चात्, सत्य को उस समय के शासन करते हुए महाजायक कैफा के सामने ले जाया गया, जो हन्ना का ही दामाद था। कैफा और यहूदी महासभा सन्हेद्रीन के सामने, बहुत से झूठे गवाह सत्य के विरूद्ध गवाही देने के लिए आ खड़े हुए, तथापि, वे कुछ भी प्रमाणित नहीं कर सके और कुछ भी गलत किए जाने के प्रति कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। कैफा ने सत्य पर दोष लगाने के प्रयास में कम से कम सात व्यवस्थाओं को तोड़ दिया : 

(1) जाँच पड़ताल को गुप्त में किया गया; (2) इसे रात में किया गया; 

(3) इसमें रिश्‍वत का उपयोग किया गया; (4) प्रतिवादी की ओर से अपने बचाव के लिए किसी को बोलने नहीं दिया गया

 (5) 2-3 गवाहों की शर्तें पूरी नहीं हो सकी थी

(6) उन्होंने प्रतिवादी के विरूद्ध आत्म-आरोप वाली गवाही को उपयोग किया

(7) उन्होंने प्रतिवादी के विरूद्ध मृत्यु दण्ड का निर्णय उसी दिन पूरा किया। इन सारी गतिविधियों को यहूदी व्यवस्था में मना किया गया है। इतना होने पर भी, कैफा ने सत्य को दोषी ठहरा दिया, क्योंकि सत्य ने शरीर में परमेश्‍वर होने का दावा किया था, जिसे कैफा ने ईशनिन्दा कह कर पुकारा।Published from Blogger Prime Android App

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