हथौडा नहीं चाबी बनो
*हथौड़ा नही चाबी बन जाओ*
*किसी गाँव में एक ताले की दुकान थी,ताले वाला रोजाना अनेकों ताले तोडा करता और अनेकों चाबियाँ भी बनाया करता था।*
*ताले वाले की दुकान में एक बच्चा भी रोज काम सीखने आया करता था।*
*बच्चा रोज देखा करता कि छोटी सी चाबी इतने मजबूत ताले को भी कितनी आसानी से खोल देती है।*
*एक दिन बच्चे ने ताले वाले से पूछा कि हथौड़ा ज्यादा शक्तिशाली है और हथौड़े के अंदर लोहा भी ज्यादा है और आकार में भी चाबी से बड़ा है लेकिन फिर भी हथौड़े से ताला तोड़ने में बहुत समय लगता है और इतनी छोटी चाबी बड़ी ही आसानी से मजबूत ताला कैसे खोल देती है* ।
*दूकानदार ने मुस्कुरा के बच्चे से कहा कि हथौड़े से तुम ताले पर ऊपर से प्रहार करते हो और उसे तोड़ने की कोशिश करते हो लेकिन चाबी ताले के अंदर तक जाती है, उसके अंतर्मन को छूती है और घूमकर ताले के अंतर्मन को बिना चोट किए स्पर्श करती है और ताला खुल जाया करता है।*
*प्रेम गहराई और अंतर्मन को तरंगित करता.प्रेम भीतर जाकर तोड़ता है इसके तोड़ने पर आवाज नहीं होता*.
*जिस प्रकार हथौड़े के प्रहार से ताला खुलता नहीं बल्कि टूट जाता है, ठीक वैसे ही बल प्रयोग,सख्ती, विरोध,आक्षेप तोड़ता है जोड़ता नहीं,बल्कि तोड़ता है.निंदा आक्षेप दिलों को छू नही सकते है।जबकि प्रेम और शालीनता से हारी हुई बाजी भी जीती जा सकती है.जहाँ प्रेम है वहाँ ईश्वर बसता है हमें हथोडा नहीं चाबी बनना चाहिए क्योंकि......*
1 यूहन्ना 2:10-11,15
[]जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता।
[]पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्धी कर दी हैं॥
[]तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है।
मुझमें प्रेम नहीं तो मैं झनझनाती झांझ हूँ.
चूने से पुती कब्र हूँ...

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